रांची विवि में 18 साल बाद प्रोफेसर बनने का रास्ता साफ

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची: रांची विवि सिंडिकेट ने 18 साल बाद रीडर से प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति देने का रास्ता साफ कर दिया है. अब कालबद्ध प्रोन्नति के तहत 16 वर्ष व 25 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले रीडर को प्रोन्नति मिलेगी. कुलपति डॉ एलएन भगत की अध्यक्षता में एक नवंबर को आयोजित सिंडिकेट ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है.

विवि ने 22 सितंबर 1995 के बाद इस व्यवस्था को बंद कर दिया था. इसके विरूद्ध शिक्षक उच्च न्यायालय भी गये. विवि ने इस बाबत महाधिवक्ता से भी राय ली थी. इसमें वैसे शिक्षक शामिल होंगे, जो मेरिट व कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत दी जा रही प्रोन्नति में शामिल नहीं हो सके. सिंडिकेट ने विवि अंतर्गत निजी बीएड कॉलेजों को अप नव संबद्धन तभी देने का फैसला लिया, जब तक की कॉलेज संबद्धन शर्त को पूरा नहीं कर लेते. सिंडिकेट ने आज वैसे कॉलेजों के नवसंबद्धन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. साथ ही तीन माह तक शर्त पूरा कर लेने का निर्देश दिया. तीन माह बाद विवि स्तर पर संबंधित कॉलेजों का निरीक्षण कराया जायेगा.
बैठक में पीपीके कॉलेज बुंडू और बीएन जलान कॉलेज सिसई के छह लैब अस्सिटेंट को डेमोस्ट्रेटर बनाने की स्वीकृति दी गयी. गोस्सनर कॉलेज के बलवीर केरकेट्टा को वित्त सहित योजना में शामिल करने की स्वीकृति दी गयी. बीएड कॉलेजों में शिक्षकों के पद सृजन की स्वीकृति दी गयी. इसके अलावा पीजी सेंटर गुमला के लिए शिक्षकों व कर्मचारियों के पद सृजन की स्वीकृति प्रदान की गयी.

बैठक में कंप्यूटर ऑपरेटर के मानदेय में सशर्त डेढ़ हजार रुपये की बढ़ोतरी व पीजी सेंटर गुमला में भवन निर्माण पर आने वाले खर्च के लिए वित्त समिति की अनुशंसा पर मुहर लगायी गयी. एकेडमिक काउंसिल में लिये गये निर्णयों पर भी मुहर लगायी गयी. नवांगीभूत कॉलेजोंकर्मियों का अब सामूहिक बीमा की राशि की कटौती करने के प्रस्ताव की स्वीकृति दी गयी. पूर्व में काटी गयी राशि को अप-टू डेट किया जायेगा. बैठक में कुल 12 एजेंडों पर निर्णय लिये गये. इस अवसर पर सभी सदस्य उपस्थित थे.

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