कटैया-निर्मली (सुपौल) से इंद्रभूषण की रिपोर्ट.
Supaul Water Crisis: पिपरा प्रखंड के पथरा उत्तर पंचायत में सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना अधूरी पड़ी है. वार्ड संख्या 6, 9, 10 और 11 में लाखों रुपये की लागत से शुरू की गई जलापूर्ति योजना का काम पिछले छह महीनों से ठप है. भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच ग्रामीण शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. लोगों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही के कारण योजना कागजों तक सीमित होकर रह गई है.
अधर में लटकी योजना, नहीं पहुंचा घरों तक पानी
ग्रामीणों के अनुसार योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने और पानी की टंकी लगाने का कार्य शुरू किया गया था. लेकिन कुछ काम होने के बाद निर्माण कार्य अचानक बंद हो गया. इसके बाद से न तो काम आगे बढ़ा और न ही जलापूर्ति शुरू हो सकी. नतीजतन लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर लोग
जलापूर्ति नहीं होने से ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है. इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के इस मौसम में शुद्ध पानी सबसे बड़ी जरूरत बन गया है, लेकिन सरकारी योजना बंद होने से परेशानी और बढ़ गई है.
महिलाओं और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
ग्रामीणों का कहना है कि योजना के ठप रहने का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है. कई परिवारों को दूर-दराज के जलस्रोतों या हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. हालांकि कई जगहों पर हैंडपंप का पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है.
विभाग ने जल्द काम शुरू करने का दिया भरोसा
इस मामले में जब जूनियर इंजीनियर धीरज कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि फिलहाल योजना का कार्य बंद है, लेकिन अगले दो दिनों के भीतर काम दोबारा शुरू कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था को जल्द बहाल करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि योजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर जल्द जलापूर्ति शुरू कराई जाए. लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी में स्वच्छ पेयजल की कमी केवल सुविधा का नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी गंभीर मुद्दा बन गई है.
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