पूर्व सैनिकों और आश्रितों के लिए बड़ी पहल, वीर परिवार सहायता योजना 2025 की दी गई जानकारी

Supaul News: सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को अब कानूनी सहायता पाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. सुपौल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 'वीर परिवार सहायता योजना 2025' की जानकारी देकर लोगों को उनके अधिकारों से अवगत कराया गया.

सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट.

Supaul News: बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर नगर परिषद वार्ड संख्या-17, सुपौल में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में ग्रामीणों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, निःशुल्क कानूनी सहायता और विशेष रूप से वीर परिवार सहायता योजना 2025 के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं के प्रति जागरूक करना था.

सैनिकों और उनके परिवारों के लिए खास पहल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार ने बताया कि नालसा द्वारा शुरू की गई वीर परिवार सहायता योजना 2025 सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय योजना है.

उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बोझ के न्याय प्राप्त कर सकें.

ऑनलाइन आवेदन और वीडियो परामर्श की सुविधा

विमलेश कुमार ने बताया कि योजना के अंतर्गत लाभार्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कानूनी परामर्श प्राप्त करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है.

उन्होंने कहा कि ई-लोक अदालत और ऑनलाइन मध्यस्थता जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं के जरिए विवादों का त्वरित और सरल समाधान भी किया जा सकेगा. इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष लाभ मिलेगा.

संविधान की भावना पर आधारित है योजना

पैनल अधिवक्ता ने बताया कि यह योजना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39(ए) में निहित समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता की अवधारणा पर आधारित है.

उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के गठन, उसकी भूमिका और विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं की जानकारी भी दी.

किन लोगों को मिलती है मुफ्त कानूनी सहायता

कार्यक्रम में बताया गया कि महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, औद्योगिक श्रमिकों, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है.

इसके माध्यम से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय व्यवस्था तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है.

बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीण

जागरूकता कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार, पारा विधिक स्वयंसेवक मो. निजाम और लाल कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे.

कार्यक्रम के दौरान लोगों ने कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और निःशुल्क विधिक सहायता से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे तथा आवश्यक जानकारी प्राप्त की.

जागरूकता से मजबूत होगी न्याय तक पहुंच

आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे कानूनी सहायता का लाभ उठा सकें. ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की जानकारी समाज के कमजोर वर्गों के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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