सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट
Supaul News : पिपरा प्रखंड के ठाढ़ी पंचायत में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई. बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड के मुस्लिम समुदाय के प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक मार्गदर्शक हजरत मौलाना फैसल रहमानी ने डीएस इंग्लिश बोर्डिंग स्कूल के चेयरमेन एम वली के साथ गरीब और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा पर विस्तृत चर्चा की. बातचीत का केंद्र आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने और उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचाने के उपाय रहे.
फीस की वजह से न छूटे स्कूल, यही सबसे बड़ी चिंता
चर्चा के दौरान आमिर-ए-शरीयत ने कहा कि आर्थिक तंगी आज भी हजारों बच्चों की शिक्षा के रास्ते में बड़ी बाधा बनी हुई है. कई विद्यार्थी फीस नहीं भर पाने के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं, जबकि अनेक छात्र दसवीं कक्षा के बाद आगे की शिक्षा जारी नहीं रख पाते. उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें हरसंभव सहयोग देने की आवश्यकता पर बल दिया.
उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से कहा कि जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, उनके बच्चों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए. जरूरतमंद छात्रों की सूची तैयार कर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाने का सुझाव भी दिया.
जरूरतमंद छात्रों को मिलेगा सहयोग
डीएस इंग्लिश बोर्डिंग स्कूल के चेयरमेन एम वली ने इस पहल का स्वागत करते हुए भरोसा दिलाया कि विद्यालय परिवार जरूरतमंद विद्यार्थियों को यथासंभव सहायता उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि फीस में रियायत समेत अन्य सहयोगात्मक उपायों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा ताकि किसी छात्र की शिक्षा बीच में न रुके.
धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी जरूरी
कार्यक्रम में मौजूद हजारों लोगों को संबोधित करते हुए आमिर-ए-शरीयत ने शिक्षा के व्यापक महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल धार्मिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है. बच्चों को उर्दू और अरबी के साथ-साथ हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और सामाजिक विज्ञान की भी मजबूत शिक्षा मिलनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक का युग तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में बच्चों को आधुनिक ज्ञान और कौशल से लैस करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है. यही शिक्षा उन्हें बेहतर अवसर दिलाएगी और समाज को नई दिशा प्रदान करेगी.
शिक्षा के लिए सकारात्मक पहल की हुई सराहना
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने गरीब और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा को लेकर हुई इस सकारात्मक पहल की सराहना की. लोगों का मानना है कि यदि समाज और शैक्षणिक संस्थान मिलकर आगे आएं तो आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे के सपनों के बीच दीवार नहीं बन पाएगा. इस संवाद से शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद और सकारात्मक संदेश गया है.
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