“अब कैसे कटेगी जिंदगी?”पति की मौत के बाद इंसाफ की आस में भटक रही काजल

Supaul Custodial Death: जिस पति के लौटने का इंतजार एक पत्नी कर रही थी, उसकी जगह घर पहुंची मौत की खबर. जदिया थाना हाजत में हुई बिट्टू कुमार की मौत के बाद उसकी पत्नी काजल देवी की दुनिया जैसे उजड़ गई है. आंखों में आंसू, गोद में मासूम बेटा और मन में एक ही सवाल- आखिर इंसाफ कब मिलेगा?

जदिया (सुपौल) से उमेश कुमार की रिपोर्ट

Supaul Custodial Death: जदिया थाना हाजत में बिट्टू कुमार की मौत के कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन उसकी पत्नी काजल देवी का दर्द कम नहीं हुआ है. पति को खोने के सदमे से उबर नहीं पाई काजल आज भी न्याय की उम्मीद में अधिकारियों और लोगों के दरवाजे खटखटा रही है. उसका कहना है कि परिवार का सहारा छिन गया, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिला है.

“पुलिस ले गई थी, लेकिन वापस जिंदा नहीं लौटे”

घर की चौखट पर बैठी काजल देवी की आंखें बार-बार भर आती हैं. वह कहती है कि उसके पति को पुलिस अपने साथ लेकर गई थी, लेकिन वे जिंदा वापस नहीं लौटे. पति की मौत ने न सिर्फ उसकी दुनिया उजाड़ दी, बल्कि पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है.

काजल का कहना है कि अब उसे सबसे ज्यादा चिंता अपने बेटे और परिवार के भविष्य की है. पति ही घर की आर्थिक जिम्मेदारी संभालते थे. उनके जाने के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

मासूम बेटे के सिर से उठ गया पिता का साया

बिट्टू कुमार की मौत के साथ ही उसके छोटे बेटे के सिर से पिता का साया उठ गया. मासूम अभी इतना छोटा है कि उसे इस त्रासदी का पूरा एहसास भी नहीं है. लेकिन घर में पसरे मातम और परिजनों के दर्द का असर उस पर भी साफ दिखाई दे रहा है.

“सिर्फ निलंबन नहीं, हत्या का मुकदमा दर्ज हो”

काजल देवी ने पुलिस विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है. यदि उसके पति की मौत पुलिस हिरासत में हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए.

उसने मांग की कि थानाध्यक्ष समेत जिन लोगों की भूमिका इस मामले में रही है, उनकी निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्चस्तरीय टीम से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके.

हर आने-जाने वाले से एक ही सवाल

काजल देवी की जिंदगी जैसे ठहर गई है. गांव में जो भी उससे मिलने आता है, वह एक ही सवाल पूछती है- “मुझे इंसाफ कब मिलेगा?” उसके चेहरे पर दर्द, बेबसी और भविष्य की चिंता साफ दिखाई देती है.

परिजनों का कहना है कि विभागीय कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन जब तक मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं होगा और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक परिवार को न्याय मिलने का एहसास नहीं होगा.

जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं उम्मीदें

फिलहाल मामले में विभागीय जांच जारी है और कई पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है. लेकिन बिट्टू की पत्नी और परिजनों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं. उन्हें उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी.

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लेखक के बारे में

By Pratyush prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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