सीमांचल को मिलेगी नई रफ्तार: ललितग्राम-वीरपुर रेल लाइन सर्वे का कार्य जारी

इस परियोजना के लिए रेलवे मंत्रालय द्वारा आवश्यक फंड भी उपलब्ध करा दिया गया है

– सांसद बोले, उनके कार्यकाल में परियोजना पूरी कराने का रहेगा प्रयास

– रेल मंत्री ने भी दिया सकारात्मक आश्वासन

वीरपुर.

लंबे समय से प्रतीक्षित ललितग्राम-वीरपुर नई रेल लाइन परियोजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. ललितग्राम से वीरपुर तक लगभग 14 से 15 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने के लिए सर्वेक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है. इस परियोजना के लिए रेलवे मंत्रालय द्वारा आवश्यक फंड भी उपलब्ध करा दिया गया है. क्षेत्र भ्रमण के दौरान सुपौल सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे भारत सरकार को भेजा जाएगा. इसके पश्चात नियमानुसार कैबिनेट की मंजूरी और रेल मंत्रालय की स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

सांसद श्री कामैत ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में रेल मंत्री से बातचीत की है. रेल मंत्री ने आश्वासन दिया है कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में रेल सेवा बहाल करने और नई रेल लाइन परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक पहल की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति प्राप्त होगी.

तीन वर्षों में कार्य पूरा कराने का लक्ष्य

परियोजना की समय-सीमा के संबंध में पूछे जाने पर सांसद ने कहा कि सर्वेक्षण कार्य पूरा होने के बाद आगे की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा, मेरा प्रयास रहेगा कि मेरे कार्यकाल के दौरान ही इस परियोजना को धरातल पर उतारा जाए. मेरे कार्यकाल के लगभग तीन वर्ष शेष हैं और कोशिश होगी कि इसी अवधि में इस कार्य को पूरा कराया जाए.

नेपाल कनेक्टिविटी व व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

जानकारों के अनुसार ललितग्राम-वीरपुर रेल परियोजना क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण और चिर-प्रतीक्षित योजनाओं में से एक है. इसके पूरा होने से सुपौल जिले के अंतिम छोर पर बसे वीरपुर को रेल नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ नेपाल सीमा क्षेत्र तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी.

इसके अलावा व्यापार, पर्यटन तथा ऐतिहासिक कोसी परियोजना से जुड़े विकास कार्यों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.

रेल लाइन के लिए वर्षों तक चला जनआंदोलन

वीरपुर को रेल हेड से जोड़ने की मांग को लेकर वर्षों तक व्यापक जन आंदोलन चलाया गया है. सर्वदलीय संघर्ष समिति, वीरपुर के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन, पदयात्रा, पैदल मार्च, साइकिल मार्च, अनशन, भूख हड़ताल और जनजागरण अभियान चलाए गए थे. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह परियोजना साकार होती है तो यह केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र के विकास की नई पटरी साबित होगी. सर्वेक्षण कार्य शुरू होने और सांसद द्वारा परियोजना को लेकर दिए गए आश्वासन के बाद वीरपुर व आसपास के क्षेत्रों के लोगों में नई उम्मीद जगी है. क्षेत्रवासियों को भरोसा है कि वर्षों पुरानी उनकी रेल संपर्क की मांग अब जल्द ही वास्तविकता में बदल सकती है.

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