वीरपुर (सुपौल)से प्रमोद कुमार की रिपोर्ट.
Kosi Flood Season Begins: कोसी नदी में बाढ़ अवधि की औपचारिक शुरुआत होते ही जल संसाधन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है. नेपाल और बिहार के संवेदनशील तटबंधों व स्परों की निगरानी बढ़ा दी गई है. विभाग ने अभियंताओं को अलर्ट मोड में रखते हुए संभावित खतरे वाले सभी स्थलों पर तैनात कर दिया है.
मंगलवार सुबह कोसी बराज पर नदी का जलस्तर 26,055 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो घटते क्रम में रहा. फिलहाल बराज के तीन फाटक खुले हुए हैं. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कोसी नदी के स्वभाव को देखते हुए स्थिति कभी भी बदल सकती है.
तटबंधों की सुरक्षा पर 40 करोड़ रुपये खर्च
जल संसाधन विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 के लिए हाई लेवल कमेटी ने करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से तटबंधों और स्परों की सुरक्षा से जुड़े कार्य कराए हैं. नेपाल क्षेत्र के 29 और भारत क्षेत्र के 21 संवेदनशील स्थानों समेत कुल 50 जगहों पर विशेष सुरक्षा कार्य पूरा किया गया है.
इसके अलावा 3.04 करोड़ रुपये की लागत से सेंट्रल पायलट चैनल का निर्माण भी कराया गया है, जिसे बाढ़ प्रबंधन की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया गया है.
अभियंता मैदान में, संवेदनशील स्थलों पर कड़ी निगरानी
बाढ़ अवधि शुरू होते ही विभाग ने सभी अभियंताओं को संबंधित तटबंधों और स्परों पर तैनात कर दिया है. संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित कटाव या दबाव की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके.
कोसी परियोजना के चीफ इंजीनियर संजीव शैलेश ने बताया कि अधिकांश एंटी-इरोजन कार्य पूरे हो चुके हैं. नेपाल के पश्चिमी एफ्लक्स बांध पर एक पुल का निर्माण कार्य जारी है, जिसे सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं शेष दो महत्वपूर्ण कार्य 5 जून तक पूरे कर लिए जाएंगे.
जलस्तर अभी कम, लेकिन कोसी के मिजाज पर नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल नदी का जलस्तर सामान्य है और किसी तटबंध या स्पर पर दबाव नहीं है. लेकिन कोसी के जलग्रहण क्षेत्र में यदि भारी बारिश होती है तो स्थिति तेजी से बदल सकती है.
चीफ इंजीनियर ने बताया कि पिछले वर्ष इसी अवधि में नदी का जलस्तर करीब 64 हजार क्यूसेक था. इसलिए विभाग किसी भी तरह की लापरवाही के पक्ष में नहीं है और पूरी बाढ़ अवधि के दौरान लगातार निरीक्षण किया जाएगा.
बाढ़ से पहले तैयारियों की परीक्षा
कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों की नजर अब मानसून और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर टिकी है. प्रशासन का दावा है कि इस बार तटबंधों की सुरक्षा, कटावरोधी कार्य और फ्लड फाइटिंग व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत की गई है. अब आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि तैयारियां कितनी कारगर साबित होती हैं.
