सुपौल में भव्य झांकी में गूंजे मानवता और समानता के संदेश, संतों ने दिया सामाजिक समरसता का मंत्र

Kabir Prakat Diwas 2026: पिपरा में कबीर प्रगट दिवस पर निकली भव्य झांकी में गूंजे कबीर के संदेश. सैकड़ों संतों और श्रद्धालुओं ने प्रेम, भाईचारे और मानवता का दिया संदेश.

कटैया-निर्मली (सुपौल) से इंद्रभूषण की रिपोर्ट

Kabir Prakat Diwas 2026: संत कबीरदास के विचारों और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पिपरा प्रखंड में रविवार को कबीर प्रगट दिवस श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया. इस अवसर पर निकली भव्य झांकी ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में रंग दिया. सैकड़ों संतों, साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने एक स्वर में सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया.

कबीर कुटी बनी आस्था और भक्ति का केंद्र

जोल्हनियां वार्ड संख्या-6 स्थित कबीर कुटी में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो गया था. कार्यक्रम का नेतृत्व महंत गरीब साहेब ने किया. उनके साथ महंत रघुनी साहब, महंत रामरतन साहब, महंत गोविंद साहब, अगुआ राजेन्द्र दास और कपालेश्वर दास सहित बड़ी संख्या में संत और अनुयायी मौजूद रहे.

झांकी में गूंजे कबीर के संदेश

भव्य झांकी गांव की विभिन्न गलियों और मार्गों से होकर निकली. इस दौरान श्रद्धालुओं ने “धर्म को किसने बचाया, सद्गुरु कबीर ने”, “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो” और “मंदिर-मस्जिद को किसने बचाया, सद्गुरु कबीर ने” जैसे जयघोष लगाए. इन नारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया.

संतों ने लोगों से जाति-पाति, ऊंच-नीच और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की अपील की. उन्होंने कहा कि कबीर साहब के विचार आज भी समाज को एकजुट करने और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने की प्रेरणा देते हैं.

सत्संग और प्रवचन में मिला सामाजिक समरसता का संदेश

झांकी के समापन के बाद कबीर कुटी परिसर में सत्संग, प्रवचन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया. संतों ने कबीर साहब के दोहों और विचारों की व्याख्या करते हुए सामाजिक समरसता, सद्भाव और मानवता को जीवन में अपनाने पर बल दिया. श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया.

संतों और श्रद्धालुओं की रही सक्रिय भागीदारी

आयोजन को सफल बनाने में संत हीरा साहब, विश्वनाथ साहब, डॉ. लक्ष्मण साहब (मधेपुरा), बद्री साहब, लखन साहब और साध्वी जयमाल सहित कई संतों एवं श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को और भव्य बना दिया.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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