सिमराही में वैश्य समाज का शक्ति प्रदर्शन: पांचवें राष्ट्रीय महासम्मेलन में हजारों लोगों की जुटान

कई राज्यों से आए प्रतिनिधियों और समाज के लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही

ओबीसी सूची में कथबनिया व कैथल वैश्य को शामिल करने की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन

राघोपुर

अखिल सिंदुरिया बनिया, कथबनिया एवं कैथल वैश्य महासभा के तत्वावधान में रविवार को सिमराही बाजार स्थित एक निजी होटल परिसर में महासभा का पांचवां स्थापना दिवस सह राष्ट्रीय महासम्मेलन भव्य एवं ऐतिहासिक रूप से आयोजित किया गया. सम्मेलन में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में समाज के लोगों ने भाग लेकर संगठन की एकजुटता और सामूहिक शक्ति का परिचय दिया.

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार, बिहार सरकार की मंत्री शीला कुमारी मंडल व सांसद दिलेश्वर कामैत, पूर्व सांसद देवेंद्र प्रसाद यादव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों से आए प्रतिनिधियों और समाज के लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही.

शिक्षा, संगठन व सामाजिक जागरूकता पर हुआ मंथन

महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना तथा समुदाय को एक मजबूत संगठनात्मक सूत्र में बांधना है. कार्यक्रम के दौरान सामाजिक विकास, युवाओं की भागीदारी, शिक्षा का विस्तार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संगठन की मजबूती जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई.

केंद्र की ओबीसी सूची में शामिल करने की उठी मांग

सम्मेलन के दौरान महासभा की ओर से बिहार विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री एवं सांसद के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन में कथबनिया एवं कैथल वैश्य जाति को केंद्र सरकार की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में सिंदुरिया बनिया जाति के साथ शामिल कराने हेतु राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुशंसा भेजने की मांग की गई. ज्ञापन में कहा गया कि सिंदुरिया बनिया, कथबनिया एवं कैथल वैश्य वस्तुतः एक ही जाति के विभिन्न उपनाम हैं तथा इनके बीच वर्षों से वैवाहिक एवं सामाजिक संबंध कायम हैं. बिहार सरकार द्वारा तीनों समुदायों को अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन केंद्र सरकार की ओबीसी सूची में केवल सिंदुरिया बनिया समुदाय का नाम दर्ज है. इसके कारण कथबनिया एवं कैथल वैश्य समुदाय के छात्र-छात्राओं और युवाओं को केंद्र सरकार की आरक्षण एवं कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है.

राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की भी मांग

महासभा के प्रतिनिधियों ने समाज को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी उठाई. उन्होंने कहा कि देशभर में समाज की अनुमानित आबादी लगभग 15 लाख है, इसके बावजूद राजनीतिक भागीदारी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है. समाज के लोगों को विभिन्न स्तरों पर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, ताकि उनकी समस्याओं और मांगों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके.

संगठन की ताकत से बढ़ता है समाज का सम्मान : डॉ. प्रेम कुमार

सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने सफल आयोजन के लिए महासभा के पदाधिकारियों और समाज के लोगों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि जब कोई समाज संगठित होता है तो उसका सम्मान और प्रभाव स्वतः बढ़ता है. सामाजिक समरसता राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और लोकतंत्र में सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है. उन्होंने युवाओं से शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जो समाज शिक्षा को प्राथमिकता देता है, वही भविष्य में राज्य और देश के नेतृत्व में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करता है. उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए समाज की मांगों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया. डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि समाज की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा तथा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सहयोग से आरक्षण संबंधी मांगों को पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा.

समाज के सर्वांगीण विकास पर वक्ताओं ने दिया जोर

मंत्री शीला कुमारी मंडल, सांसद दिलेश्वर कामैत तथा अन्य वक्ताओं ने समाज की एकता, शिक्षा, संगठन और सामाजिक उत्थान पर बल दिया. उन्होंने युवाओं से शिक्षा, सामाजिक नेतृत्व और जनसेवा के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान करते हुए समाज के सर्वांगीण विकास के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता बताई. महासम्मेलन की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार दास ने की. कार्यक्रम के संरक्षक बिरेंद्र दास एवं संयोजक अभिनंदन दास थे. सम्मेलन के सफल आयोजन पर उपस्थित लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे समाज की एकता, अधिकारों और सामाजिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कदम बताया.

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