पैक्स चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन का मामला : डीसीओ पर गिरी गाज, डीएम ने कार्रवाई की भेजी अनुशंसा

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पैक्स चुनाव के दौरान जिला सहकारिता पदाधिकारी ने वर्तमान पैक्स अध्यक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अपने पद का दुरुपयोग किया तथा आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए गोदाम निर्माण योजना स्वीकृत की.

– चुनाव के दौरान 73 लाख के गोदाम निर्माण की स्वीकृति और राशि भुगतान पर जांच में दोषी पाए गए डीसीओ सुपौल पैक्स चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन और पद के दुरुपयोग के आरोप में जिला सहकारिता पदाधिकारी (डीसीओ) की मुश्किलें बढ़ गई है. जनसुराज जिलाध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह की शिकायत पर हुई जांच में डीसीओ प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं. इसके बाद जिलाधिकारी सावन कुमार ने सचिव सहकारिता विभाग बिहार पटना, संयुक्त सचिव बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार पटना तथा निबंधक सहयोग समिति बिहार पटना को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की अनुशंसा की है. जानकारी के अनुसार शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पैक्स चुनाव के दौरान जिला सहकारिता पदाधिकारी ने वर्तमान पैक्स अध्यक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अपने पद का दुरुपयोग किया तथा आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए गोदाम निर्माण योजना स्वीकृत की. शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने त्रिवेणीगंज के भूमि सुधार उप समाहर्ता एवं अनुमंडल कृषि पदाधिकारी को संयुक्त जांच का जिम्मा सौंपा था. जांच रिपोर्ट में पाया गया कि जिला सहकारिता पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-301 दिनांक 29 जनवरी 2026 के माध्यम से छातापुर प्रखंड अंतर्गत बलुआ पैक्स में गोदाम निर्माण के लिए 72 लाख 67 हजार 954 रुपये की स्वीकृति दी गई थी. इतना ही नहीं, प्रथम किस्त के रूप में करीब 20 लाख 87 हजार रुपये भुगतान की अनुशंसा भी की गई थी. जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार की अधिसूचना संख्या-3319 दिनांक 30 दिसंबर 2025 के अनुसार जिले में 30 दिसंबर 2025 से 9 फरवरी 2026 तक आदर्श आचार संहिता प्रभावी थी. इसके बावजूद चुनाव अवधि में गोदाम निर्माण योजना की स्वीकृति एवं राशि भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि जिला सहकारिता पदाधिकारी ने विभागीय निर्देशों की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की, जो प्रथम दृष्टया आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन प्रतीत होता है. जिलाधिकारी ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट लिखा है कि आचार संहिता प्रभावी रहने के दौरान स्वीकृति एवं राशि विमुक्ति संबंधी कार्रवाई नियमों के विरुद्ध प्रतीत होती है. नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है. मामले को लेकर शिकायतकर्ता अनिल कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि छातापुर प्रखंड अंतर्गत बलुआ पैक्स में तत्कालीन अध्यक्ष को निर्विरोध जिताने के लिए विरोधी उम्मीदवार के नामांकन को रद्द कराने की कोशिश की गई. आरोप है कि अध्यक्ष पद के लिए वर्तमान अध्यक्ष प्रभात कुमार मिश्र और पूर्व अध्यक्ष अजय मिश्र ने नामांकन दाखिल किया था. विरोध में दूसरा नामांकन आने के बाद नामांकन समीक्षा के दौरान पूर्व अध्यक्ष अजय मिश्र का नामांकन रद्द कराने के लिए विभिन्न स्तर पर प्रयास किए गए. जब यह प्रयास सफल नहीं हुआ तो आदर्श आचार संहिता लागू रहने के बावजूद करीब 73 लाख रुपये की गोदाम निर्माण योजना स्वीकृत कर दी गई. साथ ही प्रथम किस्त के रूप में लगभग 21 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया.

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