सुपौल में सात दशक पुरानी आस्था का केंद्र है करजाईन का मां दुर्गा मंदिर, संध्या आरती में उमड़ते हैं सैकड़ों श्रद्धालु

Aaj Ka Darshan: सुपौल के करजाईन बाजार में स्थित मां दुर्गा मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि सात दशक से अधिक पुरानी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है. यहां होने वाली संध्या आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन चुकी है.

राघोपुर (सुपौल) से आशुतोष झा की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: राघोपुर प्रखंड के करजाईन बाजार में राष्ट्रीय राजमार्ग 131 के किनारे स्थित मां दुर्गा मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. पिछले सात दशक से अधिक समय से यहां शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना पूर्ण वैष्णवी पद्धति और वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है. नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठता है और दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

फूस के मंदिर से भव्य दो मंजिला धाम तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार बलुआ बाजार निवासी स्वर्गीय पंडित दिवाकर मिश्र ने मंदिर निर्माण के लिए अपनी भूमि दान में दी थी. शुरुआती दौर में बाजार के व्यापारियों और ग्रामीणों के सहयोग से फूस का एक छोटा पूजा स्थल बनाया गया था. समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग बढ़ता गया और आज यह मंदिर भव्य दो मंजिला भवन के रूप में स्थापित है.

बुजुर्गों का कहना है कि स्वर्गीय मांगन दास को मां भगवती ने स्वप्न में मंदिर निर्माण का आदेश दिया था. इसके बाद उन्होंने मंदिर निर्माण की पहल की. उनके निधन के बाद कुशल शिल्पकारों द्वारा आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण कराया जाने लगा, जो आज भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.

संध्या आरती बनती है श्रद्धा का सबसे बड़ा उत्सव

नवरात्र के दौरान मंदिर की संध्या आरती विशेष महत्व रखती है. प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आरती में शामिल होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. आरती के समय मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और भक्ति गीतों से गूंज उठता है, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है.

आचार्य पंडित धर्मेंद्रनाथ मिश्र और पंडित महाकांत झा वैदिक मंत्रोच्चार तथा दुर्गा सप्तशती पाठ के माध्यम से पूजा को संपन्न कराते हैं. वहीं पुजारी सुभाष चंद्र झा पूजा व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करते हैं.

आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी प्रतीक

दुर्गा पूजा समिति और स्थानीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी से यहां धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए जाते हैं. समिति के पदाधिकारियों और युवाओं के सहयोग से यह मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत कर रहा है.

करजाईन का यह ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर आज भी हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी समृद्ध धार्मिक परंपरा से जोड़ने का कार्य कर रहा है.

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Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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