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महाशिवरात्रि पर बाबा महेंद्रनाथ की जरूर करें दर्शन, जानें घंटी बांधने और पोखर परिक्रमा का रहस्य

Updated at : 28 Feb 2022 6:15 PM (IST)
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महाशिवरात्रि पर बाबा महेंद्रनाथ की जरूर करें दर्शन, जानें घंटी बांधने और पोखर परिक्रमा का रहस्य

महाशिवरात्रि पर बाबा महेंद्रनाथ की पूजा करने पर पुत्र की प्राप्ती होती है और चर्मरोग से छुटकारा मिलता है. भगवान शिव के प्राचीन महेंद्रनाथ मन्दिर बिहार के सीवान जिले में स्थित है.

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इस साल महाशिवरात्रि का पर्व 1 मार्च 2022 दिन मंगलवार यानि आज है. इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस वर्ष महाशिवरात्रि पर शुभ मुहूर्त और शुभ संयोग के साथ ही पंचग्रही योग बन रहे है. इस योग में भगवान शिव की पूजा करने पर आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्योहार हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन भक्त शिवरात्रि का व्रत रख देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए पूरे विधि विधान से पूजा-अर्चना करते है.

जानें बाबा महेंद्रनाथ मंदिर की मान्यताएं

मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर बाबा महेंद्रनाथ की पूजा करने पर पुत्र की प्राप्ती होती है और चर्मरोग से छुटकारा मिलता है. भगवान शिव के प्राचीन महेंद्रनाथ मन्दिर बिहार के सीवान जिले में स्थित है. बाबा महेंद्रनाथ मंदिर का निर्माण नेपाल नरेश महेंद्रवीर विक्रम सहदेव सत्रहवीं शताब्दी में करवाया था. महाशिवरात्रि के दिन बाबा महेंद्रनाथ की दर्शन करने के लिए काफी दूर-दूर से श्रद्धालु आते है. पौराणिक कथा के अनुसार,नेपाल के नरेश महेंद्रवीर विक्रम सहदेव को कुष्ठरोग हो गया था. वह अपने कुष्ठरोग का इलाज कराने वाराणसी जा रहे थे और अपनी वाराणसी यात्रा के दौरान घने जंगल में विश्राम करने के लिए एक पीपल के वृक्ष के निचे रूके.

स्नान करने पर नेपाल के राजा का ठीक हुआ था कुष्ठरोग

विश्राम करने से पहले हाथ मुंह धोने के लिए पानी की तलाश रहे थे. काफी तलाशने के बाद उन्हें एक गड्ढे में पानी मिला. राजा विवश होकर उसी में हाथ मुंह धोने लगे. जैसे ही गड्ढे का पानी कुष्ठरोग से ग्रस्त हाथ पर पड़ा, हाथ का घाव व कुष्ठरोग गायब हो गया. उसके बाद राजा ने उसी पानी से स्नान कर लिया और उनका कुष्ठरोग समाप्त हो गया. विश्राम करते हुए राजा वही सो गए और उन्हें स्वप्न में भगवान शिव आये और वहां (पीपल के वृक्ष के नीचे) होने के संकेत दिए. फिर राजा शिवलिंग को ढूंढने के लिए लिए उस स्थान पर मिट्टी खुदवाया और उन्हें उस स्थान पर शिवलिंग मिला.

जानें कैसे हुआ मन्दिर का निर्माण

पीपल के वृक्ष के निचे से शिवलिंग को निकालकर राजा ने शिवलिंग को अपने राज्य में ले जाने की योजना बनाई तो उसी रात भगवान शिव जी ने राजा को पुन: स्वप्न में आकर कहा कि तुम शिवलिंग की स्थापना इसी स्थान पर करो और मन्दिर का निर्माण करवाओ. पीपल के वृक्ष के निचे से शिवलिंग को निकालकर राजा ने अपने राज्य में ले जाने की योजना बनाई तो उसी रात भगवान शिव ने राजा को स्वप्न में आकर कहा कि तुम शिवलिंग की स्थापना इसी स्थान पर करो और मन्दिर का निर्माण करवाओ.

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क्यू मंदिर के प्रांगण में बांधते है घंटी

किसी भी भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती है, तो मंदिर के मुख्य दरवाजे के सामने घंटी बांधते है. मंदिर परिसर के बगल में बहुत बड़ी पोखरा है. मान्यता है कि इस पोखरे की खुदाई राजा ने हल बैल से की थी. आज उस पोखरे को कमलदाह पोखरा के नाम से जाना जाता है. इस पोखरे में कमल पुष्प बहुत खिलते है. इस तालाब में स्नान करने के बाद तालाब का जल लेकर महेंद्रनाथ को अभिषेक करते है. यह पोखरा लगभग ढाई सौ बीघा में स्थित है़ इस पोखरा की परिक्रमा से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है.

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