गलत नर्णिय से वर्षों तक निलंबित रही प्राचार्या
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jan 2016 7:47 PM
गलत निर्णय से वर्षों तक निलंबित रही प्राचार्या — डीइओ ने रंजना को प्रभार ग्रहण करने की दी अनुमति — भंग शासी निकाय ने किया था निलंबन की कार्रवाई सीतामढ़ी : श्री मथुरा प्रसाद कैप्टन राम निवास महिला कॉलेज, सीतामढ़ी की प्राचार्य रंजना सिन्हा को शासी निकाय ने आठ जुलाई 13 को निलंबित कर दिया […]
गलत निर्णय से वर्षों तक निलंबित रही प्राचार्या — डीइओ ने रंजना को प्रभार ग्रहण करने की दी अनुमति — भंग शासी निकाय ने किया था निलंबन की कार्रवाई सीतामढ़ी : श्री मथुरा प्रसाद कैप्टन राम निवास महिला कॉलेज, सीतामढ़ी की प्राचार्य रंजना सिन्हा को शासी निकाय ने आठ जुलाई 13 को निलंबित कर दिया था, जबकि उससे पूर्व हीं शासी निकाय को सरकार भंग कर चुकी थी. यानी खुद शासी निकाय अस्तित्व में नहीं था और उस निकाय के सदस्यों ने इतना बड़ा निर्णय ले लिया था. हद तो यह कि प्राचार्या की शिकायत के आलोक में प्रशासन को यह सिद्ध करने में ढ़ाई वर्ष लग गये कि शासी निकाय का निलंबन करने का निर्णय वैध नहीं था. — अब जाकर मिला न्याय बहरहाल, वर्षों बाद हीं सही प्राचार्या रंजना सिन्हा को अब न्याय मिला है. डीइओ जय प्रकाश शर्मा ने 14 जनवरी को पत्र जारी कर रंजना सिन्हा को प्राचार्य का प्रभार ग्रहण करने की अनुमति दे दी है. बता दें कि श्रीमती सिन्हा 17 अगस्त 1991 से उक्त कॉलेज में कार्यरत थी. कॉलेज के शासी निकाय के सचिव के पत्र के आलोक में श्रीमती सिन्हा को निलंबित कर दिया गया था. उनकी शिकायत पर तत्कालीन डीएम के आदेश पर तत्कालीन डीइओ द्वारा कॉलेज में जाकर जांच की गयी थी और डीएम को सौंपी गयी रिपोर्ट में यह कहा गया था कि विभाग के विज्ञापन संख्या 31/2012 के आलोक में शासी निकाय भंग है, इस लिहाज से उसका निर्णय वैध नहीं है. सदर एसडीओ ने भी मामले की जांच की थी और 30 अगस्त 13 को सौंपी रिपोर्ट में डीइओ की जांच रिपोर्ट का समर्थन किया था. — डीइओ का है मानना जारी पत्र में डीइओ श्री शर्मा ने कहा है कि भंग शासी निकाय के द्वारा रंजना सिन्हा के निलंबन का कोई औचित्य नहीं बनता है. श्रीमती सिन्हा का पूर्ववत अपने पद पर बने रहने का दावा बनता है. उनके अभ्यावेदन की समीक्षा के बाद डीइओ ने प्राचार्य की कुरसी संभालने की हरी झंडी दे दी है. वैसे डीइओ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बोर्ड अथवा किसी उच्च अधिकारी द्वारा अन्यथा आदेश पारित होने पर उनका आदेश स्वत: प्रभावित समझा जायेगा.
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