कृषि वैज्ञानिकों ने दी नयी तकनीकी की जानकारी

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कृषि वैज्ञानिकों ने दी नयी तकनीकी की जानकारी सीतामढ़ी. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आसीएआर) लखनऊ, उत्तर प्रदेश से आये कृषि वैज्ञानिकों का दल रीगा प्रखंड के चैनपुरा गांव में 13 अक्तूबर को कृषकों के साथ एक कार्यशाला में कृषि के क्षेत्र में किसानों को नयी तकनीक की जानकारी दी गयी. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास […]

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कृषि वैज्ञानिकों ने दी नयी तकनीकी की जानकारी सीतामढ़ी. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आसीएआर) लखनऊ, उत्तर प्रदेश से आये कृषि वैज्ञानिकों का दल रीगा प्रखंड के चैनपुरा गांव में 13 अक्तूबर को कृषकों के साथ एक कार्यशाला में कृषि के क्षेत्र में किसानों को नयी तकनीक की जानकारी दी गयी. राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक(नाबार्ड) प्रायोजित संस्था, सीतामढ़ी किसान क्लब संघ के बैनर तले आयोजित इस कार्यशाला का संचालन संघ के जिला अध्यक्ष राम श्रेष्ठ सिंह कुशवाहा द्वारा किया गया. दो दिवसीय इस कार्यशाला में आसीएआर लखनऊ के आये वैज्ञानिक डा रजनीश ने कहा कि बहार के बदलते मौसम में पानी की कमी को पूरा करने के लिए हाइड्रोल नामक दवा का इस्तेमाल करने से वहां किसान खेत में चार पटवन करते हैं. उसके स्थान पर मात्र दो पटवन करना पड़ेगा. यह दवा जमीन में नमी बनाये रखने का काम करता है और इसके प्रयोग से जमीन का उर्वरा शक्ति नष्ट नहीं होता है. कृषि विज्ञान केंद्र, पुपरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ मनोहर पंजिकार ने फूलगोभी, टमाटर, बैगन, आलू आदि सब्जी व दलहन में लगने वाले किट प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा किया. मौके पर जितेंद्र प्रसाद सिंह, राम सुफल सिंह, बिहारी सिंह, रामनंदन सिंह, उपेंद्र सिंह, विक्रमादित्य कुमार, नंदकिशोर सिंह, विनोद सिंह, रामबाबू पाल, विजय पाल, विलास राम, राम गोविंद व सुलेसर सिंह समेत दर्जनों किसान मौजूद थे.

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