बालू के ढेर पर हरिहरक्षेत्र का दिख रहा ऐतिहासिक नजारा

Published at :25 Nov 2015 6:26 AM (IST)
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बालू के ढेर पर हरिहरक्षेत्र का दिख रहा ऐतिहासिक नजारा

हाजीपुर : हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेले में बालू की रेत पर बनी कलाकृति देख हर कोई मोहित हो रहा है. पूरे मेले में एक अलग ढंग का आकर्षण बना है. मधुरेंद्र ने तीन ट्रक बालू को व्यवस्थित कर उससे हरिहर क्षेत्र मेले के ऐतिहासिक और धार्मिक परिदृश्य को स्पष्ट रूप से दरसाया है. यहां के साधु […]

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हाजीपुर : हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेले में बालू की रेत पर बनी कलाकृति देख हर कोई मोहित हो रहा है. पूरे मेले में एक अलग ढंग का आकर्षण बना है. मधुरेंद्र ने तीन ट्रक बालू को व्यवस्थित कर उससे हरिहर क्षेत्र मेले के ऐतिहासिक और धार्मिक परिदृश्य को स्पष्ट रूप से दरसाया है.

यहां के साधु गाछी, काली घाट, हरिहर नाथ मंदिर, गंडक किनारे का मनोहर दृश्य, गजेंद्र मोक्ष धाम तथा अन्य आकर्षक स्थलों को चित्रित किया है. इसके अलावा मेला स्थल के ईद- गिर्द अवस्थित बाग-बागीचे एवं नदी की तसवीर को बालू के ढेर पर देखने वालों की अपार भीड़ उमड़ रही है.

किसान पुत्र की कारीगरी के कायल हुए लोग : पूर्वी चंपारण के बीजबनी गांव निवासी किसान शिव कुमार साह व गेना देवी के पुत्र मधुरेंद्र कुमार की कलाकारी से मेले में आये हर उम्र के लोग प्रशंसा कर रहे हैं. वर्ष 1994 के पांच सितंबर को धरती पर कदम रखने वाले किसान के बेटे ने अपनी मेहनत के बदौलत गांव की गली से निकल कर विदेश तक बिहार का नाम रोशन किया है. अपने गांव के रमणा आश्रम में गुरु बाबा नरसिंह के आशीर्वाद से उसने ख्याति पायी है.
नेपाल में सम्मािनत : मधुरेंद्र को कलाकृति के लिए नेपाल में अवार्ड मिला है, जिससे उसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है. वह बिहार के भागलपुर, राजगीर, गया, दरभंगा, वैशाली, सारण, देवघर,सुलतानगंज,सीतामढ़ी सहित अन्य जगहों पर भी सम्मानित हो चुका है. इसके बाद दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में आयोजित कला प्रदर्शनी में कई बार पुरस्कृत किया गया. बिहार में इसे बिहार गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया.
कई हिस्सों में रेत कला को किया प्रदर्शित : काफी कम उम्र में ही मधुरेंद्र ने बिहार के कई महोत्सव और मेले में अपनी रेत कला को प्रदर्शित करने के साथ ही देश के कई ख्याति प्राप्त आयोजनों में भी कलाकृति प्रस्तुत कर नाम रोशन किया है. राजगीर महोत्सव, हरिहर क्षेत्र महोत्सव, बिहार महोत्सव से लेकर दिल्ली के फन फेयर, कोलकाता के कला उत्सव और नेपाल के गढ़ी माई महोत्सव में भी बालू की रेत पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दरसाया है.
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