समस्तीपुर: खरीफ सीजन शुरू, कृषि वैज्ञानिकों ने मक्का, धान और तिल की खेती के लिए जारी की सलाह

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए मक्का, धान, तिल और सब्जी फसलों की खेती को लेकर विशेष सलाह जारी की है. किसानों को समय पर नर्सरी तैयार करने, उर्वरक प्रबंधन और उन्नत किस्मों के चयन की जानकारी दी गई है. पढ़ें पूरी खबर..

समस्तीपुर से गिरिजा नन्दन शर्मा की रिपोर्ट

Samastipur News: जून माह के साथ खरीफ फसलों की बोआई का समय शुरू हो चुका है. वर्तमान मौसम की परिस्थितियां खेती-किसानी के लिए अनुकूल बनी हुई हैं. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से समय पर खेतों की तैयारी और बोआई कार्य पूरा करने की अपील की है, ताकि मानसून का अधिकतम लाभ उठाया जा सके.

मक्का की खेती के लिए खेत तैयार करने की सलाह

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मक्का की खेती करने वाले किसान अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 100 से 150 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करें. इसके साथ 30 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालने की सलाह दी गई है. उत्तर बिहार के किसानों को शक्तिमान-2, शक्तिमान-5, शक्तिमान-6 तथा राजेन्द्र शंकर मक्का-3 जैसी उन्नत हाइब्रिड किस्मों की खेती करने की सलाह दी गई है.

25 जून तक तैयार करें धान की नर्सरी

धान की खेती के लिए यह नर्सरी तैयार करने का उपयुक्त समय माना जा रहा है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से 25 जून तक धान की नर्सरी तैयार करने को कहा है. मध्यम अवधि वाली किस्मों में संतोष, सीता, सरोज, सहभागी धान तथा राजेन्द्र श्वेता की सिफारिश की गई है. वहीं सुगंधित धान की किस्मों में राजेन्द्र सुवासिनी, राजेन्द्र कस्तूरी और राजेन्द्र नगवती को उपयुक्त बताया गया है.

हरी खाद के रूप में ढैंचा का करें उपयोग

विशेषज्ञों ने धान रोपाई से पहले खेत की उर्वरता बढ़ाने के लिए ढैंचा की खेती करने की सलाह दी है. इसके लिए 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज का उपयोग किया जा सकता है. ढैंचा की फसल 40 से 45 दिनों बाद खेत में पलटने से मिट्टी में जैविक पदार्थ और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है. इससे प्राकृतिक रूप से 70 से 75 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन की उपलब्धता होती है.

तिल की खेती में जल निकासी का रखें ध्यान

तिल की बोआई मध्य जून से मध्य जुलाई तक की जा सकती है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जल निकासी वाली ऊंची भूमि का चयन करने की सलाह दी है. बीज उपचार के लिए प्रति किलोग्राम बीज में दो ग्राम थीरम का उपयोग करने की अनुशंसा की गई है. तिल की उन्नत किस्मों में कृष्णा, कालिका और कांके सफेद को बेहतर माना गया है.

सब्जियों और प्याज की नर्सरी को बारिश से बचाएं

विशेषज्ञों ने मिर्च, कद्दू, खीरा, नेनुआ और लौकी जैसी सब्जियों में नियमित निकाई-गुड़ाई और कीट प्रबंधन करने की सलाह दी है.

साथ ही खरीफ सब्जियों की बोआई शुरू करने और एग्री फाउंड डार्क रेड किस्म के प्याज की नर्सरी तैयार करने को कहा गया है. बारिश से पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उठी हुई क्यारियों पर नर्सरी बनाने तथा पॉलीथीन शेड की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है.

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By Sarfaraz Ahmad

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