Bihar Agriculture Advisory: राज्य में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए फसलों के प्रबंधन और बोआई को लेकर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक निर्देश जारी किए हैं. कम बारिश से होने वाली खरपतवार वृद्धि, जलभराव और नमी की कमी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए धान, अरहर, उड़द, मिश्रीकंद और खरीफ प्याज की खेती के लिए विशेष सुझाव दिए गए हैं.
धान के खेतों में खरपतवार नियंत्रण
कम बारिश के कारण धान में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं:
- रोपाई के 5 से 7 दिन बाद प्रति हेक्टेयर 500-600 लीटर पानी में ब्यूटाक्लोर (3.0 लीटर), प्रेटिलाक्लोर (1.5 लीटर) या पेंडीमेथालिन (3.0 लीटर) मिलाकर छिड़काव करें.
अरहर और उड़द की वैज्ञानिक खेती
- अरहर: इसकी बोआई अच्छे जल निकास वाले ऊंचे स्थानों पर मेढ़ बनाकर करें. उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित किस्में 'बहार पूसा-9', 'राजेन्द्र अरहर-1' व '2' हैं. प्रति हेक्टेयर 18-20 किग्रा बीज का प्रयोग करें और बोआई से पहले कार्बेन्डाजिम व राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें.
- उड़द: उपयुक्त किस्में 'टी-9', 'पंत यू-19', 'पंत उड़द-31', 'उत्तरा' तथा 'नवीन' हैं. 20-25 किग्रा/हेक्टेयर बीज दर के साथ संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें.
मिश्रीकंद और खरीफ प्याज का प्रबंधन
- मिश्रीकंद: राजेंद्र मिश्रीकंद-1 और 2 किस्मों की बोआई के लिए जुलाई में 15-20 किग्रा/हेक्टेयर तथा अगस्त में 30-40 किग्रा/हेक्टेयर बीज का प्रयोग करें.
- खरीफ प्याज: जुताई के समय प्रति हेक्टेयर 150-200 क्विंटल सड़ी गोबर की खाद मिलाएं. कम बारिश और तेज धूप से बचाने के लिए नर्सरी के ऊपर 6-7 फीट की ऊंचाई पर शेड नेट लगाएं.
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