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महोत्सव खत्म, अब बिसर जायेंगे सब मंडन धाम

Updated at : 04 Oct 2019 8:37 AM (IST)
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महोत्सव खत्म, अब बिसर जायेंगे सब मंडन धाम

विनोद झा, महिषी : प्रकृति के बिगड़े मिजाज, आदर्श आचार संहिता व प्रशासन की हठधर्मिता के बीच पर्यटन मंत्रालय बिहार सरकार व जिला प्रशासन के द्वारा आयोजित होने वाला उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव शांतिपूर्ण संपन्न हो गया. 2012 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सेवायात्रा के दौरान उग्रतारा के जलाभिषेक के बाद द्वैत अद्वैत के महमीमांसक पंडित […]

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विनोद झा, महिषी : प्रकृति के बिगड़े मिजाज, आदर्श आचार संहिता व प्रशासन की हठधर्मिता के बीच पर्यटन मंत्रालय बिहार सरकार व जिला प्रशासन के द्वारा आयोजित होने वाला उग्रतारा सांस्कृतिक महोत्सव शांतिपूर्ण संपन्न हो गया.

2012 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सेवायात्रा के दौरान उग्रतारा के जलाभिषेक के बाद द्वैत अद्वैत के महमीमांसक पंडित मंडन मिश्र के धाम की दयनीय स्थिति को देख विकास की मंशा से महिषी को पर्यटन से जोड़ने का मन बनाया था. पर्यटन मंत्रालय के द्वारा मंदिर व मंडन धाम के विकास के लिए तीन करोड़ से भी अधिक राशि की स्वीकृति दी.
मंडन धाम पर निर्माण काल में खुदाई में अति पौराणिक अवशेष मिले व पुरातत्व सर्वेक्षण पटना अंचल की मनाही के बाद कोई निर्माण नहीं हो पाया. धाम के समीप जलाशय की सीढ़ी का निर्माण तो कर दिया, लेकिन इस जलाशय में भूल से भी कोई जानवर तक पानी पीने भी नहीं जाता.
मंडन धाम पर अवस्थित राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय का खंडहर स्वयं को मंडन की विरासत कहलाने में भी संकोच महसूस कर रहा है. इसी धाम पर प्रतिवर्ष राष्ट्रीय सेमिनार में भगवती उग्रतारा की विशिष्टताओं व मंडन के दर्शन पर देश के विभिन्न भागों से आने वाले विद्वान अपना आख्यान देते जिला प्रशासन से कई बार महिषी की संस्कृति के खातिर विद्यालय के नवनिर्माण व शिक्षकों की नियुक्ति की मांग करते रहे.
लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों को महोत्सव की समाप्ति के बाद इसकी सुध नहीं रही. जिला प्रशासन महोत्सव में आवंटित राशि से सांस्कृतिक कार्यक्रम का योजना समायोजन कर स्वयं के कर्तव्यों का इतिश्री मानता रहा है. मुख्य कार्यक्रम स्थल राजकमल क्रीड़ा मैदान में लाखों का वारा न्यारा हुआ, लेकिन अगर वर्षा रानी की कृपा नहीं होती तो कारपेट बिछाना मजबूरी बन जाती.
प्रतिवर्ष मंत्री, सांसद व विधायकों ने पर्यटन क्षेत्र में स्थानीय पौराणिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक महत्ता का बखान करते बहुत सारे सब्जबाग दिखाये, लेकिन इस बगिया में फूल खिलने की संभावना नहीं बन पायी. इस वर्ष तो आयोजकों की बल्ले बल्ले रही. मौसम खराब होने का बहाना बता मंडन धाम पर सेमिनार के लिए पंडाल बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ी.
तीन दिन में कार्यक्रम स्थल के मंच व पंडाल का निर्माण ही चुनौतीपूर्ण रहा. पिछले वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष रास्तों में रोशनी का भी प्रबंध नहीं हो पाया. विवाह भवन में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं के लिए तो एक पंखा भी नहीं लगा. कार्यक्रम में श्रोताओं को तिरपाल के नीचे बैठे देखना लूट का संज्ञान देता रहा.
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