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किशनगंज समेत बिहार के 10 जिलों में शुरू होगी पीजी की पढ़ाई, डिग्री कॉलेज में 30 छात्र पर एक शिक्षक अनिवार्य

प्रदेश के 10 जिले सुपौल, गोपालगंज, कैमूर, किशनगंज, लखीसराय, जमुई, अरवल, बांका, नवादा एवं शिवहर में अब पीजी की पढ़ाई शुरू होगी. अभी तक इन जिलों में स्नातक की पढ़ाई ही चल रही थी.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
विजय कुमार चौधरी
विजय कुमार चौधरी
शिक्षामंत्री

पटना. प्रदेश के 10 जिले सुपौल, गोपालगंज, कैमूर, किशनगंज, लखीसराय, जमुई, अरवल, बांका, नवादा एवं शिवहर में अब पीजी की पढ़ाई शुरू होगी. अभी तक इन जिलों में स्नातक की पढ़ाई ही चल रही थी. गुरुवार को शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई विशेष बैठक में यह निर्णय लिया गया.

शिक्षा मंत्री के मुताबिक सुपौल के बीएसएस और जमुई के केकेएम कॉलेज में पीजी की पढ़ाई शुरू कराने के लिए स्वीकृति दे दी गयी है. शेष जगहों से जैसे ही प्रस्ताव आयेंगे,उनके लिए स्वीकृति दे दी जायेगी.

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि प्रदेश में सकल नामांकन अनुपात को तेजी से बढ़ाया जाये. लिहाजा बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि ऐसे जिले, जहां अभी तक पीजी की पढ़ाई नहीं हो रही है,वहां प्राथमिकता के आधार पर पढ़ाई शुरू की जाये.

शिक्षा मंत्री चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक हर पंचायत में एक माध्यमिक विद्यालय की स्थापना की जा चुकी है. वहीं प्रत्येक अनुमंडल में स्नातक की पढ़ाई शुरू कराने के लिए डिग्री कॉलेजों की स्थापना की जा रही है. उउच्च शिक्षा की बेहतरी के लिए जल्द कई निर्णय लिये जायेंगे. उच्चतर शिक्षा परिषद की देखरेख में समितियां काम कर रही हैं.

डिग्री कॉलेज में 30 छात्र पर एक शिक्षक होना अनिवार्य

शिक्षा विभाग ने राज्य में स्थित अंगीभूत एवं राजकीय महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के संदर्भ में औपचारिक नीति जारी की है. दरअसल यह नीति उन कॉलेजों के लिए है, जहां पहले से स्नातक की पढ़ाई हो रही है.

नीति में साफ कर दिया गया है कि स्नातकोत्तर में पद सृजन की कवायद विश्वविद्यालय के सक्षम प्राधिकार की अनुशंसा पर शुरू की जायेगी. वर्तमान में विशेष कॉलेजों में केवल स्नातकोत्तर की पढ़ाई विशेष अकादमिक दशाओं में की जा सकती है.

शिक्षा विभाग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिला में कम से कम ऐसे स्नातक अंगीभूत महाविद्यालय एवं राजकीय महाविद्यालय जिसमें कला/वाणिज्य/ विज्ञान ( प्रतिष्ठा स्तर) का अध्ययन होता है. इन कॉलेजों में संकाय के पठित विषय में 30 छात्रों पर एक शिक्षक की उपलब्धता पर स्नातकोत्तर का अध्यापन शुरू किया जा सकता है.

शिक्षा विभाग के उप सचिव अरशद फिरोज की तरफ से प्रदेश के सभी विवि के कुल सचिवों को जारी पत्र में यह भी बताया गया है कि विवि के सक्षम प्राधिकार की अनुशंसा के उपरांत पहले स्नातकोत्तर अध्यापन की अनुमति दी जायेगी.

Posted by Ashish Jha

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