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सीएम नीतीश कुमार ने शिक्षा विभाग पर जतायी नाराजगी, बोले- अब नियोजित नहीं कहिए, अब सभी सिर्फ शिक्षक हैं

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में 134 लोग फरियाद लेकर पहुंचे, जिनका सीएम ने ऑन स्पॉट निबटारा किया. सबसे ज्यादा शिकायतें शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग से जुड़ी थीं.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
जनता दरबार में फरियाद सुनते सीएम नीतीश कुमार
जनता दरबार में फरियाद सुनते सीएम नीतीश कुमार
फाइल

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में 134 लोग फरियाद लेकर पहुंचे, जिनका सीएम ने ऑन स्पॉट निबटारा किया. सबसे ज्यादा शिकायतें शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग से जुड़ी थीं. शिक्षा विभाग में वेतन से जुड़े कुछ मामले 1980 के आसपास के आये थे. इन्हें तुरंत विभाग को देखने का आदेश सीएम ने दिया.

पूर्णिया के बड़हरा प्रखंड निवासी गौरव कुमार ने बताया कि माध्यमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों (पीटी) की बहाली पदवर्ग समिति से अनुशंसा के बाद भी नहीं हो रही है. शिक्षा विभाग बोलता है कि मुख्यमंत्री ही नहीं चाहते, तो बहाली कैसे होगी.

इस पर सीएम ने पूछा कि विभाग में कौन बोलता है, यह बात. युवक ने विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्राथमिक शिक्षा निदेशक का नाम लिया. इस पर सीएम ने तुरंत अपर मुख्य सचिव को फोन लगाया और बोले कि पीटी की बहाली से संबंधित प्रस्ताव आपलोग मेरे पास लेकर कभी नहीं आये, तो इस पर निर्णय कैसे होगा.

यह लड़का जो बोल रहा है, उसे समझ लीजिए और तुरंत इस पर कार्रवाई कीजिए. विभाग के स्तर पर इनकी बहाली का निर्णय लेकर इस प्रस्ताव को मेरे पास लेकर आयें. तब कोई अंतिम निर्णय लिया जायेगा.

एक अनुदानित कॉलेज के शिक्षक ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन वेतन नहीं देता है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएम ने शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी से पहले फोन पर फिर पास बुला कर बात की. कहा कि अनुदानित कॉलेजों में यह समस्या आ रही है.

अब सभी सिर्फ शिक्षक हैं

अरवल से आये एक शिक्षक ने बताया कि वे नियोजित शिक्षक हैं, फिर भी उनका तबादला गया कर दिया गया है. इस पर सीएम ने कहा कि अब नियोजित मत कहिए, नियोजित शब्द को हटा दिया गया है. अब सभी शिक्षक ही हैं. आप नियोजित शिक्षक नहीं रहे. उन्होंने शिक्षा विभाग को तुरंत इस मामले को देखने को कहा.

वहीं, नवादा के निजी स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि निजी स्कूलों में आरटीइ (शिक्षा का अधिकार कानून) के तहत पढ़ने वाले 25 फीसदी बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि सरकार के स्तर से नहीं मिली है. यह राशि करीब पांच साल से नहीं मिली है. इससे कोरोना के कारण निजी स्कूलों की हालत काफी खराब हो गयी है. इस पर मुख्यमंत्री उचित कार्रवाई करने को शिक्षा विभाग से कहा.

बांका के शंभुगंज प्रखंड से आयी युवती ने बताया कि वह स्नातक पास है, लेकिन उसे प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है. उसकी तरह कुछ अन्य युवतियों ने भी इसकी शिकायत की. इस पर सीएम ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया. कुछ शिक्षकों ने ज्वाइन करने के चार-पांच साल बाद भी वेतन नहीं मिलने की शिकायत की. इस पर भी तुरंत सीएम ने एक्शन लेने का निर्देश विभाग को दिया.

जहानाबाद समेत कुछ अन्य जिलों से आये लोगों ने शिक्षक नियोजन में गड़बड़ी का मामला उठाया. गोपालगंज की सोनी कुमारी ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की तीसरी किस्त नहीं मिलने की शिकायत की. एक युवक ने कृषि पाठ्यक्रम में लोन नहीं मिलने की बात कही.

Posted by Ashish Jha

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Published Date

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