नीतीश सरकार नहीं चाहती, सूबे में उद्योग लगे : सुशील मोदी
Updated at : 28 Sep 2016 7:24 AM (IST)
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पटना : भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नयी औद्योगिक नीति को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नहीं चाहती है कि बिहार का अौद्योगिकीकरण हो. 2011 की औद्योगिकी नीति में उद्यमियों को सरकार की ओर से जो छूट मिली थी या अनुदान मिलता […]
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पटना : भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नयी औद्योगिक नीति को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नहीं चाहती है कि बिहार का अौद्योगिकीकरण हो. 2011 की औद्योगिकी नीति में उद्यमियों को सरकार की ओर से जो छूट मिली थी या अनुदान मिलता था सभी को 2016 की औद्योगिक नीति में समाप्त कर दिया गया है. पहले की नीति में उद्यमियों को 40 फीसदी तक अनुदान मिलता था. मोदी मंगलवार को जनता दरबार के बाद अपने आवास पर पत्रकारों से बात कर रहे थे. मोदी ने कहा कि औद्योगिक नीति 2011 में उद्यमियों को जो पूंजीगत अनुदान मिलता था उसे समाप्त कर दिया गया.
प्लांट और मशीनरी पर 20 फीसदी अधिकतम 75 लाख, नये बड़े उद्योगों को 20 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान, अधिकतम 5 करोड़ व फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को 35 प्रतिशत का अनुदान इनमें 60 प्रतिशत अनुदान उद्योग लगाने के दौरान और 40 प्रतिशत लगाने के बाद दिया जाता था जिसे समाप्त कर दिया गया. कार्बन क्रेडिट इंसेटिव को भी समाप्त कर दिया गया.
तकनीकी जानकारी के लिए वित्तीय सहायता को समाप्त कर दिया गया. कैप्टिव पावर व जनरेटर पर जो अनुदान था उसे समाप्त कर दिया गया. बिजली की मासिक गारंटी को समाप्त कर दिया गया.
अब सरकार सिर्फ बैंक लोन पर ब्याज अनुदान देगी. मोदी ने कहा कि जब कोई उद्योग लगेगा ही नहीं तो फिर सरकार अनुदान क्या देगी. सरकार की इस तरह की नीति से राज्य का औद्योगिकीकरण नहीं हो सकता. सरकार को राष्ट्रीय स्तर के औद्योगिक संगठनों से परहेज है. बिहार के बारे में जस्टिस काटजू के बयान पर कहा कि इस पर तो नीतीश कुमार को उत्तर देना चाहिए. काटजू उनको पीएम बना रहे थे.
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