पटना : इस्तीफा देने के बाद भी काम कर रहे शिक्षकों पर एफआइआर का आदेश

Updated at : 01 Feb 2020 8:36 AM (IST)
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पटना : इस्तीफा देने के बाद भी काम कर रहे शिक्षकों पर एफआइआर का आदेश

पटना : शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश दिया है कि इस्तीफा देने के बाद भी काम कर रहे नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों पर प्राथमिकी दर्ज कराएं. शिक्षक के अलावा नियोजन करने वाली इकाई और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा है. […]

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पटना : शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आदेश दिया है कि इस्तीफा देने के बाद भी काम कर रहे नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों पर प्राथमिकी दर्ज कराएं. शिक्षक के अलावा नियोजन करने वाली इकाई और जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा है. महाजन ने तत्काल जांच कर कार्रवाई की रिपोर्ट तीन दिनों में मांगी है.
वेतन भुगतान की वसूली भी होगी : शुक्रवार को जारी इस आदेश में लिखा है कि त्यागपत्र देने के बाद भी काम करना वित्तीय अनियमितता व धोखाधड़ी है. ऐसे लोगों से अब तक किये गये वेतन भुगतान की वसूली की जायेगी. शिक्षा विभाग को हाल ही में कुछ समाचार माध्यमों से पता चला है कि इस्तीफा देने के बाद भी कई जिलों में नियोजित काम कर रहे हैं.
वसूली से संबंधित समूची जानकारी 10 फरवरी तक शिक्षक मांगी गयी है. उल्लेखनीय है कि 2005 से 2014 के बीच हुए शिक्षक नियोजन के संबंध में काफी गड़बड़ियां पायी गयी थीं. 22 जून, 2015 को जारी आदेश में कहा गया था कि प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के नियोजित शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्षों, जिसने जाली
शैक्षणिक और प्राशैक्षणिक प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पायी है, यदि स्वेच्छा से समय सीमा के अंदर नौकरी से त्यागपत्र देते हैं, तो उन्हें माफी दी जायेगी. ऐसी परिस्थिति में आपराधिक प्रकरण भी ऐसे शिक्षकों के खिलाफ दर्ज नहीं होगा.
नियोजन में गड़बड़ी पर मांगा जवाब
पटना : पटना हाइकोर्ट ने राज्य में शिक्षक नियोजन में हुई अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करते हुए चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है.
चीफ जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रंजीत पंडित द्वारा दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. कोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सूबे में लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षक नियोजित हुए. इनमें से 1.10 लाख शिक्षकों के फोल्डर अब तक नहीं मिले हैं. फर्जी डिग्री के आधार पर नियोजित शिक्षकों से पैसे की वसूली अब तक नहीं की जा सकी है. लगभग 1300 शिक्षकों के विरुद्ध मामले दर्ज कराये गये हैं, लेकिन वे सभी शिक्षक अब भी सेवा में बने हुए हैं.
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