देश भर में भीख मांगने पर रोक लगाने की पहल, पटना पहुंच कर केंद्रीय टीम ने ली बिहार की योजना की जानकारी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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पटना : देशभर के भिखारियों को भीख मांगने से रोके जाने को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है. केंद्र सरकार ने बिहार में 2011-12 से शुरू हुई मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना को अब सभी राज्यों के दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू करने की तैयारी में है. भिखारियों को भीख मांगने से रोके जाने के बाद उन्हें प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जायेगा.

मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के संचालन को समझने और जानकारी लेने के उद्देश्य से केंद्र के समाज कल्याण विभाग की तीन सदस्यीय टीम बुधवार को पटना पहुंची. टीम ने तीन घंटे तक योजना के बारे में जानकारी ली. साथ ही भिक्षावृत्ति से मुक्त कराये गये लोगों से मुलाकात कर जानकारी हासिल की. भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में निदेशक वीरेंद्र मिश्रा ने इस बाबत बताया कि बिहार के मॉडल को पहले अन्य राज्यों के दो-दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुरू किया जायेगा. उसके बाद योजना की समीक्षा होगी. उसके बाद पूरे देश में इस योजना को लागू किया जायेगा.

केंद्रीय टीम राजधानी से सटे दानापुर के पास कुष्ठ रोगियों की बस्ती में जाकर वहां रहनेवालों से मुलाकात की. केंद्रीय टीम उस जगह पर भी गयी, जहां भिक्षावृत्ति से मुक्त कराये गये भिखारियों को रहने के लिए राज्य सरकार सेवा कुटीर एवं शांति कुटीर चला रही है. यहां भिखारियों का इलाज भी होता है. केंद्रीय टीम ने पूरी व्यवस्था को देखकर संतुष्ट दिखे. केंद्रीय टीम पटना सिटी स्थित गुलगुलिया कमेटी भी गयी, जहां भिक्षावृत्ति निवारण योजना से जुड़े लोगों से मुलाकात की.

मालूम हो कि बिहार में योजना के तहत भिखारियों का आधार कार्ड बनाया जा रहा है. कार्ड बनने के बाद भिखारियों का पुनर्वास किया जा रहा है. राज्य सरकार द्वारा भिखारियों के लिए राज्य के सात जिलों में सेवा कुटीर और शांति कुटीर चलाये जा रहे हैं. इन कुटीरों भिखारियों का निबंधन किये जाने के बाद आवास, भोजन, इलाज सहित अन्य बुनियादी सुविधा प्रदान की जाती है.

समाज कल्याण विभाग के स्टेट सोसाइटी फॉर अल्ट्रा पूअर एंड सोशल वेलफेयर की ओर से भिखारियों के लिए पुनर्वास योजना चला रहा है.18-35 वर्ष के भिक्षुकों के लिए कौशल कुटीर के माध्यम से कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है. भिक्षुकों की समस्या को जानने के बाद, पहले उनके परिवार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है. इसके लिए कानूनी सहायता भी ली जाती है.

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