पटना एम्स में ज्यादातर मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज, बड़ी संख्या में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी हैं पॉजिटिव

पटना एम्स के कई विभागों के वार्डों में इन दिनों सामान्य मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है. कुछ ऐसे भी वार्ड हैं, जिनको फिलहाल कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. इनमें भर्ती बहुत से मरीजों की छुट्टी कर दी गयी है.
पटना. कोरोना वायरस का असर शहर के अस्पतालों में देखने को मिल रहा है. नॉन कोविड यानी सामान्य मरीजों को सही इलाज नहीं मिलने की वजह से इन दिनों सबसे अधिक परेशानी बढ़ी है. पटना एम्स के कई विभागों के वार्डों में इन दिनों सामान्य मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है. कुछ ऐसे भी वार्ड हैं, जिनको फिलहाल कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया है. इनमें भर्ती बहुत से मरीजों की छुट्टी कर दी गयी है. इससे अस्पताल के इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर में दबाव बढ़ गया है. रोजाना 20-25 मरीज बिना इलाज के लौट रहे हैं. खासकर अस्पताल के नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और गैस्ट्रोलॉजी समेत कई विभागों के मरीजों को इलाज के लिए जहोजहद करनी पड़ रही है.
एम्स में कोरोना के सबसे अधिक मरीज बढ़ने और करीब तीन दर्जन से अधिक डॉक्टरों व 100 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मियों के पॉजिटिव होने से संस्थान प्रशासन ने 40% बेड कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व कर रखा है. बहुत सारे ऑपरेशन वाले मरीजों की छुट्टी कर आगे की तारीख दी गयी है. अब यह मरीज परेशान होने पर इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं.
वहीं, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अन्य अस्पतालों की तुलना में पटना एम्स में सबसे अधिक कोरोना के मरीज भर्ती किये गये हैं. मरीज बढ़ने की वजह से डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगायी गयी है. इसकी वजह से कुछ वार्ड बंद किये गये हैं. हालांकि कैंसर, डायलिसिसि समेत अन्य सभी विभागों में मरीजों की भर्ती हो रही है.
केस 1- बिहटा निवासी 58 साल के राजेश्वर प्रसाद को पेशाब में रुकावट की समस्या है. कोविड से पहले वह एम्स में इलाज करा रहे थे. डॉक्टरों ने प्रोस्टेट का ऑपरेशन करने के लिए कहा था. इसके लिए सुबह एम्स पहुंचे. इंट्री गेट के पास सुरक्षा गार्डों ने कोरोना रिपोर्ट नहीं होने की वजह से घुसने नहीं दिया.
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केस 2- पटना सिटी में किराये के मकान में रहने वाली 56 वर्षीय इंदू कुमारी के पेट में पानी भर गया है. साथ ही उनको लिवर की भी बीमारी है. मंगलवार की देर रात अचानक दर्द बढ़ने के बाद परिजन एम्स लेकर पहुंचे. लेकिन, इमरजेंसी वार्ड में एक भी बेड खाली नहीं था. बाद में परिजन पीएमसीएच लेकर चले गये.
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