Nawada News : आध्यात्मिकता और मानवता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार को रजौली मुख्यालय स्थित घसियाडीह मैदान में संत निरंकारी मिशन का भव्य आध्यात्मिक समागम आयोजित किया गया. उत्तर प्रदेश से विशेष रूप से पहुंचे मिशन के वरिष्ठ ज्ञान प्रचारक सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने रजौली ब्रांच में उपस्थित होकर संगत को आत्मज्ञान और ब्रह्मज्ञान से रूबरू कराया. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह सत्संग, भजन-कीर्तन और प्रार्थना के साथ हुई. सेवा दल के भाई-बहनों ने पूरे मैदान को अनुशासित और स्वच्छ बनाए रखा. दूर-दराज से पहुंची साध-संगत ने भक्तिभाव के साथ कार्यक्रम में भाग लिया.
अपने आप को जानो, तभी जीवन सफल होगा
ज्ञान प्रचारक सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने अपने प्रवचन में कहा कि आज मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में अपनी आत्मा को भूल गया है. उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर विराजमान परम शक्ति यानी ब्रह्म को नहीं पहचानता, तब तक उसे सच्ची शांति नहीं मिल सकती. उन्होंने बताया कि ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने के बाद ही इंसान अहंकार, घृणा और जाति-धर्म के भेदभाव से ऊपर उठ पाता है.
उन्होंने कहा कि सेवा, सत्संग और सुमिरन जीवन में संतुलन और आनंद लाने वाले तीन प्रमुख स्तंभ हैं. उन्होंने संगत से अपील की कि वे अपने जीवन में प्रेम, एकता और भाईचारे को अपनाएं, क्योंकि यही संत निरंकारी मिशन का मूल संदेश है. प्रवचन के दौरान कई जिज्ञासुओं ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त किया और अपने जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया. उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक ज्ञान से समाज में फैली नफरत और तनाव को कम किया जा सकता है.
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मुखी और सेवा दल ने निभाई अहम भूमिका
इस अवसर पर रजौली ब्रांच के मुखी सुबोध कुमार ने सभी अतिथियों और संगत का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन का उद्देश्य पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखना है. जाति, मजहब और भाषा से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करना ही सच्ची भक्ति है.
कार्यक्रम में सेवा दल के भाई-बहनों ने भोजन, पानी और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली. आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में महिला और पुरुष संगत पहुंची और ज्ञान प्रचारक के प्रवचन का लाभ उठाया.
विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए की गयी प्रार्थना
कार्यक्रम के समापन पर ज्ञान प्रचारक ने विश्व शांति, सद्भाव और मानव कल्याण के लिए प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि अगर हर इंसान अपने अंदर के ब्रह्म को पहचान ले, तो धरती से दुख और अशांति अपने आप खत्म हो जाएगी.
घसियाडीह मैदान में आयोजित यह आध्यात्मिक समागम रजौलीवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना. लोगों ने संत निरंकारी मिशन की ओर से समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की, ताकि समाज में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा मिल सके.
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