सदर अस्पताल में हर सप्ताह जान गंवा रही हैं बेटियां
Updated at : 09 Mar 2017 8:36 AM (IST)
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नवादा : जिले के सदर अस्पताल में हर माह सैकड़ों की संख्या में बेटियां पैदा ले रही हैं. औसतन एक दिन में 7 से 9 बच्चियां सदर अस्पताल में जन्म लेती हैं.अस्पताल प्रबंधन और सरकार की तमाम सुविधाओं के बाद भी जन्म ले रही बेटियों के मरने का सिलसिला जारी है. बताया जा रहा है […]
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नवादा : जिले के सदर अस्पताल में हर माह सैकड़ों की संख्या में बेटियां पैदा ले रही हैं. औसतन एक दिन में 7 से 9 बच्चियां सदर अस्पताल में जन्म लेती हैं.अस्पताल प्रबंधन और सरकार की तमाम सुविधाओं के बाद भी जन्म ले रही बेटियों के मरने का सिलसिला जारी है. बताया जा रहा है कि जागरूकता बढ़ा कर व गर्भावस्था में सावधानियां बरत कर बच्चियों की मौत को रोका जा सकता है.
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद कहते हैं कि नवजात शिशुओं की मौतों में गिरावट आयी है. दशकों पूर्व होनेवाली मौत को स्वास्थ्य सुधारों के जरिये रोका गया है. पहले की तुलना में मरनेवाली नवजात बच्चियों की संख्या में कमी आयी है. इन दिनों नवजात बच्चियों की ज्यादातर मौतें गर्भावस्था में माता के कुपोषण के कारण हो रही है.
साथ ही दो बच्चों के जन्म के अंतराल को भी ठीक नहीं किया जा रहा है. सदर अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी माह में कुल 267 बच्चियों ने जन्म लिया था. इनमें से चार की मौत जन्म लेने के साथ ही हो गयी. इसी तरह फरवरी में 233 बेटियों ने जन्म लिया था जिनमें से छह की मौत हो गयी.चालू महीने में आठ मार्च तक सदर अस्पताल में 44 बेटियां पैदा हुईं.
इनमें से एक की मौत हो गयी. जन्म के बाद होनेवाली मौतों को रोकने के लिये जरूरी है कि व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाये जायें. गर्भस्थ माताओं को कुपोषण से बचाया जाये. सिविल सर्जन ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर चलायी जा रही जननी योजना का व्यापक लाभ हुआ है.
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