विशालकाय बाज पर सवार रहेंगी मां

Published at :13 Oct 2015 7:57 PM (IST)
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विशालकाय बाज पर सवार रहेंगी मां

विशालकाय बाज पर सवार रहेंगी मां जंगल की प्राकृतिक सुंदरता में होगा रण संग्रामपंडाल को अद्वितीय मंदिर का आकर देने में जुटे हैं कारीगरबिजली आॅफिस के सामने मुसलिम कारीगर बना रहे भव्य पंडाल फोटो- 15प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयशहर के बिजली ऑफिस के सामने स्थापित होने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा हर साल पूरे जिले के लिए […]

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विशालकाय बाज पर सवार रहेंगी मां जंगल की प्राकृतिक सुंदरता में होगा रण संग्रामपंडाल को अद्वितीय मंदिर का आकर देने में जुटे हैं कारीगरबिजली आॅफिस के सामने मुसलिम कारीगर बना रहे भव्य पंडाल फोटो- 15प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयशहर के बिजली ऑफिस के सामने स्थापित होने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा हर साल पूरे जिले के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है. यहां बाढ़ की विभीषिका, युद्ध क्षेत्र व ग्रामीण परिवेश जैसे समसामयिक मुद्दों को पहले ही उकेरा जा चुका है. यहां पूजा का आयोजन करने वाली श्री दुर्गा पूजा समिति, गया रोड जिले भर में अपना खास पहचान रखती है. इस साल भी यहां श्रद्धालु प्लाइवुड की विशाल आर्ट पेंटिंग के अद्भुत दृश्य को देखेंगे. श्री दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष वृंदा यादव ने बताया कि विगत दो दशकों से पूजा स्थल पर दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है. सन 1996 से शुरू हुई माता दुर्गा की पूजा श्रद्धा व आस्था के साथ परंपरागत तरीके से की जाती है. इस साल शहरवासी विशाल मंदिरनुमा पंडाल में मां दुर्गा के दर्शन करेंगे. बिहारशरीफ के मूर्तिकार गोविंद देव प्रतिमाओं को बनाने में जुटे हैं. इस साल प्लाइवुड की आर्ट पेंटिंग में जंगल का दृश्य उकेरा जा रहा है. माता दुर्गा विशालकाय बाज पर सवारी करती नजर आयेंगी. जंगल के बीच पहाड़, पेड़, नदी, झरने आदि भी दिखेंगे. साथ ही बच्चे हिरन, गैंडा आदि जंगली जानवरों को देख सकेंगे. प्राकृतिक दृश्य के बीच माता दुर्गा व महिषासुर का रण संग्राम होगा. इसमें लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश व कार्तिकेय भी युद्ध करते नजर आयेंगे. सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देते मुसलमान कारीगर विशाल मंदिर बना रहे हैं. झारखंड के पंडाल निर्माता सुलेमान अंसारी ने बताया कि जिले भर में इस पंडाल के बेजोड़ खूबसूरती की चर्चा होगी. लगभग अाठ कारीगर एक महीने से पंडाल बनाने में जुटे हैं. सुलेमान ने बताया कि आपसी भाईचारे के साथ हिंदू-मुसलिम एक दूसरे के त्योहार मनाये व सहयोग करें. इससे पूरे देश को हम कौमी एकता की मिसाल पेश करेंगे. पूजा समिति के सचिव दिलीप कुमार ने बताया कि यहां हर साल हजारों भक्त माता का दर्शन करने उमड़ते हैं. विशाल पंडाल व भव्य मूर्ति देखने आयी भीड़ को नियंत्रित करना काफी कठिन होता है. ऐसे में समिति के 50 स्वयंसेवक कार्यकर्ता सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहते हैं. मुहल्लेवासी भी मेला प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते हैं. पूजा की तैयारियों को लेकर समिति के सदस्य पूरी श्रद्धा और भक्ति से जुटे हैं. पूजा आयोजन में लागत – (रुपये में)पंडाल निर्माण®2,00,000मूर्ति निर्माण®30,000प्लाइवुड आर्ट पेंटिंग®45,000लाइटिंग®50,000पूजा व अन्य खर्च®50,000

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