290 का यूरिया मिल रहा 550 रुपये में
Updated at : 07 Jan 2015 10:39 AM (IST)
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बिहारशरीफ (नालंदा) : जिले में इस बार फिर रबी फसल के मौसम में यूरिया बाजार से गायब हो गया है. जिन व्यवसायियों के पास यूरिया है भी, वे या तो बेचने का नाम नहीं ले रहे हैं और यदि बेच रहे हैं, तो लगभग दोगुने दामों में. यूरिया की कीमत सुन कर किसानों के पसीने […]
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बिहारशरीफ (नालंदा) : जिले में इस बार फिर रबी फसल के मौसम में यूरिया बाजार से गायब हो गया है. जिन व्यवसायियों के पास यूरिया है भी, वे या तो बेचने का नाम नहीं ले रहे हैं और यदि बेच रहे हैं, तो लगभग दोगुने दामों में.
यूरिया की कीमत सुन कर किसानों के पसीने छूट रहे हैं. किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने में व्यवसायी तथा कालाबाजारी करने वाले लोग कोई कोर-कसर छोड़ना नहीं चाहते हैं. जिले के लगभग सभी प्रखंडों में यही स्थिति है.
सामान्य दिनों में 290 रुपये प्रति बोरा बिकने वाला यूरिया 500 रुपये प्रति बोरा तक बेचा जा रहा है. किसानों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गयी है. किसानों द्वारा आसपास के प्रखंडों से भी यूरिया खरीदा जा रहा है.
बेन प्रखंड के किसान अमरेंद्र कुमार मौलाना, अनिल कुमार, नवेंदु प्रसाद तथा इस्लामपुर प्रखंड के किसान सुरेंद्र प्रसाद, कमलेश प्रसाद, विमल कुमार, चंडी के किसान अशोक कुमार, दिलीप कुमार, थरथरी प्रखंड के किसान सुधीर कुमार आदि ने बताया कि अभी किसानों को अपने खेतों में खाद डालने का समय है. इसका फायदा उठाने में व्यवसायी पीछे नहीं रहते हैं. किसान किसी भी कीमत पर खाद खरीदने को उतावले हैं.
बरसात ने बिगाड़ा खेती का गणित
जिले में ऐसे मौके पर बरसात हुई कि किसानों के खेती का सारा गणित ही उलटा-पुलटा हो गया. किसान बताते हैं कि इन दिनों गेहूं की खेती की सिंचाई कर उनमें खाद डाली जाती है. अचानक बरसात हो जाने से अभी सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं है. बल्कि खेतों में सिर्फ खाद छिड़क देने से किसानों का काम पूरा हो जायेगा. यदि इस कार्य में थोड़ा भी विलंब किया गया, तो उन्हें फिर से सिंचाई करनी होगी, जिससे खर्च बढ़ेगा. बरसात होने से एक ही साथ सारे किसानों को यूरिया की जरूरत आ गयी. अन्यथा खेतों में खाद डालने की प्रक्रिया धीरे-धीरे चलती रहती और कोई समस्या नहीं आती.
मिलावटी खादों से भी परेशानी
इन दिनों अचानक खाद की मांग बढ़ जाने से जहां इसकी कीमतों में भारी इजाफा हो गया है. वहीं, मिलावटी खादों का भी भय किसानों को सता रहा है. अस्थावां प्रखंड के किसान केदार प्रसाद ने बताया कि खादों की कीमत में बेतहाशा वृद्धि के बावजूद असली खाद मिलने की कोई गारंटी नहीं है.
आजकल व्यवसायियों द्वारा अधिक मुनाफा कमाने के लिए यूरिया में दूसरे सस्ते उर्वरक, नमक आदि भी मिला कर बेच देते हैं, जिससे फसलों को लाभ के बजाय नुकसान पहुंचता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
असमय बरसात होने से अचानक यूरिया की मांग में काफी वृद्धि हो जाने से समस्या उत्पन्न हो गयी है. खाद विक्रेताओं के पास यूरिया नहीं है. अगली रेक आने पर स्थिति सामान्य हो जायेगी.
दीपक कुमार
प्रखंड कृषि पदाधिकारी, बिहारशरीफ
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