बिना नक्शे के ही बन रहे मकान

Updated at :18 Nov 2016 4:55 AM
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बिना नक्शे के ही बन रहे मकान

उल्लंघन. पांच वर्षों में नगर निगम ने पास किये मात्र 602 नक्शा मुंगेर शहर को स्मार्ट सिटी के दौर में शामिल करने के लिए जहां प्रशासनिक स्तर पर कवायद चल रही है. वहीं इस ऐतिहासिक शहर का विकास बिना मानक के अनुसार ही हो रहा है जो आने वाले समय में मुश्किल पैदा कर सकता […]

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उल्लंघन. पांच वर्षों में नगर निगम ने पास किये मात्र 602 नक्शा

मुंगेर शहर को स्मार्ट सिटी के दौर में शामिल करने के लिए जहां प्रशासनिक स्तर पर कवायद चल रही है. वहीं इस ऐतिहासिक शहर का विकास बिना मानक के अनुसार ही हो रहा है जो आने वाले समय में मुश्किल पैदा कर सकता है. शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र से लेकर गली-मोहल्ले में धड़ल्ले से भवनों का निर्माण बिना नक्शा का ही हो रहा है. जबकि नगरपालिका अधिनियम के तहत शहरी क्षेत्र में मकान बनाने के लिए विधिवत नक्शा पास कराना जरूरी है. लेकिन हाल यह है कि सिर्फ उन्हीं भवनों का नक्शा नगर निगम से पास कराया जाता जिन्हें अपने मकान बनाने के लिए बैंक से लोन लेनी हो.
मुंगेर : शहरी क्षेत्र के लोगों को मकान बनाने के पूर्व नक्शा पास कराना जरूरी है. इसके तहत निर्धारित फॉर्म के साथ जमीन का कागजात (स्वामित्व का अधिकार), दाखिल खारिज व केवाला का दस्तावेज लगाया जाता है. साथ ही मानक के अनुरूप निर्धारित शुल्क के भुगतान के बाद नगर निगम द्वारा
नक्शा को स्वीकृति दी जाती है और तभी शहरी क्षेत्र में भवन का निर्माण होना है. यदि मकान की ऊंचाई 10 मीटर तक होती है तो उन्हें 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान करना पड़ता है. 15 मीटर ऊंचाई तक 15 रुपये एवं 15 मीटर से ऊपर तक निर्माण कराया जाता है तो 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान करना होगा. लेकिन मुंगेर शहरी क्षेत्र में बिना नक्शा के ही या नगर निगम से नक्शा पास कराये ही भवनों का निर्माण किया जा रहा है.
10 मीटर की ऊंचाई तक ही बनेगा मकान : मुंगेर भूकंप जोन का प्रमुख केंद्र है. 1934 के भूकंप में मुंगेर पूरी तरह ध्वस्त हो गया था. उसके बाद मुंगेर शहर को नये सिरे से बसाया गया. भूकंप का प्रमुख केंद्र होने के कारण नगर निगम प्रशासन द्वारा 10 मीटर ऊंचाई तक ही यानी तीन तल्ला मकान की स्वीकृति दी जा सकती है. लेकिन मुंगेर में आज सैकड़ों ऐसे मकान हैं जो चार-पांच तल्ला है. फलत: भूकंप का झटका आने पर सिर्फ वह मकान ही नहीं बल्कि आस पड़ोस के कई मकानों के लिए भी खतरा बना रहता है.
शहरी क्षेत्र में मकान बनाने के पूर्व नक्शा पास कराना अनिवार्य है
नक्शा पास कराना अनिवार्य
नगर विकास एवं आवास विभाग ने 2014 से प्रत्येक नगर निगम को निर्देश दिया था कि शहरी क्षेत्र में मकान बनाने के पूर्व नक्शा पास कराना अनिवार्य है. लेकिन निगम की लचर कार्यप्रणाली के कारण यह कारगर नहीं हो पा रहा और लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे. जिसके कारण लोग अपने अनुसार मकान का निर्माण कर रहे हैं. पिछले पांच वर्षों के दौरान मुंगेर शहर में दस हजार से अधिक मकानों का निर्माण हुआ होगा. लेकिन नगर निगम से मात्र 602 नक्शे ही पास हुए हैं. बताया जाता है कि एक बार जो नक्शा पास होता है उसके निर्माण की अवधि तीन वर्ष होती है. यदि इस दौरान मकान नहीं बना तो एक वर्ष का एक्सटेंशन देने का प्रावधान है.
अमीन के पद हैं रिक्त
यूं तो नगर निगम में नक्शा पास कराने के लिए दो वास्तुकार हैं. जिसके माध्यम से नक्शा को पास किया जाता है. इसके साथ ही अमीन का पद भी पिछले डेढ़ दशक से रिक्त है. वर्ष 2011 में अमीन सुबोध कुमार सेवानिवृत्त हो गये. जिसके बाद निगम द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग एवं वित्त विभाग की ओर से सेवानिवृत्त कर्मी को संविदा पर कार्य कराया गया. वह भी एक सप्ताह पूर्व कार्य से मुक्त हो गये. जिसके बदले में अमीन का कार्यभार प्रारूपक को सौंप दिया गया जो अमीन का कार्य कर रहे हैं.
टैक्स तहसीलदार को निर्देश दिया गया है कि बिना नक्शा पास कराने वाले मकान मालिक को नोटिस करे और नक्शा पास कराने के बाद ही मकान का निर्माण नियमत: होना चाहिए. इस मामले में निगम द्वारा जागरूक करने का भी काम किया जायेगा.
डॉ एसके, नगर आयुक्त
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