न मजदूरी मिली न मुआवजा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jun 2016 5:21 AM
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परेशानी. आपदा के समय नाविक मोड़ सकते हैं अपना मुंह प्रलयंकारी बाढ़ ने जब तबाही मचानी शुरू कर दी थी़ तब पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए मुंगेर जिले के मल्लाह से प्रशासन ने किराये पर नाव लिया था. उस भीषण बाढ़ के आठ साल बीत गये़, किंतु मुंगेर जिला प्रशासन द्वारा […]
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परेशानी. आपदा के समय नाविक मोड़ सकते हैं अपना मुंह
प्रलयंकारी बाढ़ ने जब तबाही मचानी शुरू कर दी थी़ तब पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए मुंगेर जिले के मल्लाह से प्रशासन ने किराये पर नाव लिया था. उस भीषण बाढ़ के आठ साल बीत गये़, किंतु मुंगेर जिला प्रशासन द्वारा आठ नाविकों को अब तक उनके नाव वापस नहीं किये गये. इतना ही नहीं उन्हें जो किराया भुगतान किया जाना था, उसकी भी कोई खोज खबर अब तक नहीं ली गयी है़ जिसके कारण नाविकों के हाथों से रोजगार तो छिन ही गया, नाव का मुआवजा भी नहीं दिया गया़
मुंगेर : वर्ष 2008 में कोशी क्षेत्र में आयी प्रलयंकारी बाढ़ ने जब तबाही मचानी शुरू कर दी थी़ तब पीड़ित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए मुंगेर जिले के मल्लाह से जिला प्रशासन ने किराये पर नाव लेकर भेजा था. उस भीषण बाढ़ के आठ साल बीत गये़ किंतु मुंगेर जिला प्रशासन द्वारा आठ नाविकों को अब तक उनके नाव वापस नहीं किये गये. इतना ही नहीं उन्हें जो किराया भुगतान किया जाना था, उसकी भी कोई खोज खबर अब तक नहीं ली गयी है़ जिसके कारण नाविकों के हाथों से रोजगार तो छिन ही गया, नाव का मुआवजा भी उन्हें नहीं दिया गया़
आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे नाविक
शहर के लल्लूपोखर निवासी आठ मल्लाह परिवार बंगाली सहनी, कृष्ण नंदन सहनी, सुरेश सहनी, विनोद सहनी, विकास कुमार, गणेश सहनी, सोनेलाल सहनी तथा भोला सहनी ने वर्ष 2008 में आयी बाढ़ के दौरान जिला प्रशासन को किराये पर अपना नाव दिया था़ आठों नाव का कुल किराया 5,13,630 रुपये हआ था़ नाविकों को काफी उम्मीद थी कि बाढ़ खत्म होने के बाद उन्हें उनके नाव का किराया मिलेगा़
लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि नाविकों को उनका किराया मिलना तो दूर उन्हें उनका नाव तक वापस नहीं लौटाया गया़ पिछले आठ साल से पीड़ित नाविक अंचल कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय तथा समाहरणालय का चक्कर काट रहे हैं, किंतु उन्हें न तो किराये का भुगतान किया जा रहा है और न ही नावों का मुआवजा ही़
अब कौन बनेगा बाढ़ पीड़ितों का तारणहार
जिले में बाढ़ जैसी आपदा का आना कोई नयी बात नहीं है़ साल दो साल में एक बार जिले के दियारावासियों को बाढ़ का दंश झेलना ही पड़ता है़ किंतु विपदा के उस घड़ी में एक नाविक ही हैं जो बाढ़ पीड़ित परिवारों को काल के गाल से बाहर निकाल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद करते हैं. किंतु जब नाविकों के साथ जिला प्रशासन द्वारा ही बेरोजगार कर दिया जायेगा तो फिर आपदा के उस घड़ी में बाढ़ पीड़ितों का खेवनहार कौन बनेगा़ हालांकि जिलाधिकारी उदय कुमार सिंह ने मामले की पूरी तहकीकात कर नाविकों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है.
शहर के आठ नाविकों के हाथों से छिन गया रोजगार, झेल रहे आर्थिक संकट का दंश, जिला प्रशासन मौन
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