बच्चे बोले, पटाखा खरीदने की नहीं करेंगे जिद

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Oct 2016 4:32 AM

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मधुबनी : छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं व शिक्षकों ने इस साल दीपावली पर्व के दौरान आतिशबाजी नहीं करने का संकल्प लिया है. इन लोगों ने कहा है कि हर साल आतिशबाजी करने से न केवल आर्थिक दोहन होता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषित होती है. जिसका प्रतिकूल प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है. इन लोगों ने यह […]

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मधुबनी : छोटे-छोटे छात्र-छात्राओं व शिक्षकों ने इस साल दीपावली पर्व के दौरान आतिशबाजी नहीं करने का संकल्प लिया है. इन लोगों ने कहा है कि हर साल आतिशबाजी करने से न केवल आर्थिक दोहन होता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषित होती है. जिसका प्रतिकूल प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है. इन लोगों ने यह भी कहा कि आतिशबाजी के अलावे दीपावली पर्व में चायनीज उत्पादों का भी उपयोग नही करने का हमलोगों ने निर्णय लिया है. इस साल इस स्कूल के छोटे छोटे बच्चों ने इको फ्रेंड्ली दीपावली मनाने का निर्णय लिया गया है.

ध्रुविका वर्णवाल. पटाखे छोड़ने में पहले बहुत अच्छा लगता था, पर जब पर्यावरण के प्रदूषण होने के जानकारी हुई तो यह अहसास हुआ कि यह उपयोगी नहीं बल्कि फिजूलखर्ची है.
अनन्या चौधरी. इससे वातावरण को भारी नुकसान पहुंचता है और लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. इसलिए आतिशबाजी के जगह लड्डृ बांटकर खुशियों का इजहार करेंगे.
प्रिंस. दीपावली हंसी खुशी का पर्व है. इसमें लोग पटाखा व फूलझड़ियां छोडकर पर्यावरण को प्रभावित करते हैं. हम लोग इस बार से प्रदुषण रहित दीपावली मनायेंगे. केवल दीप जलाकर अपने परिवार सहित दोस्तों के बीच मिठाईयां बाटेंगे.
प्रियांशु. ने कहा कि अपने परिवार के सदस्यों को भी आतिशबाजी नहीं करने को प्रेरित कर प्रदूषणमुक्त दीपावली मनाने के लिए प्रेरित करेंगे और एक एक पौधा हर सदस्यों के द्वारा लगवाने का काम करेंगे.
छात्र युवराज. पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने की जिम्मेदारी हर लोगों को लेनी चाहिए. सभी लोगों को इको फ्रेंड्ली दीपावली मनाना चाहिए.
वृष्टि. कहती है कि इस साल पटाखा फुलझड़ी छोड़ने के बजाय उन्होंने अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाने का संकल्प लिया है. कहा है कि पटाखे छोड़ने के दौरान असावधानी की वजह से दुर्घटना हो जाती है. हमारा पूरा परिवार इस साल पटाखा नहीं छोड़े जाने का संकल्प लिया है.
विद्यालय के निदेशक महेश चंद्र पांडेय. इस साल हमलोग और हमारे सहयोगी शिक्षक भी पटा नहीं छोड़ने, घी के दीये जलाने, एक एक पौधे लगाने व पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभिभावकों व बच्चों को जागरुक करने का काम करेंगे. हम लोग भी अपने बच्चों व परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आस परोस के लोगों को आतिशबाजी नहीं करने को प्रेरित करेंगे.
निहारिका कुमारी (प्राचार्य ). छोटे छोटे बच्चे खुद जाकर बाजार से पटाखा की खरीद नहीं करते हैं. हम अभिभावक ही इन सामान को
बाजार से शौक से लाकर बच्चों को देते है. हमें अपनी इस आदत में सुधार करना होगा.
अन्यथा कई गंभीर परिणाम सामने आयेंगे और हमें ही भुगतना होगा.
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