बाबा आब अहीं करियौक सिंहेश्वर मे जाम के उपाय
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Feb 2016 8:11 AM (IST)
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सिंहेश्वर : जिले के सुप्रसिद्ध बाबा नगरी सिंहेश्वर स्थान में रविवार को दिन भर श्रद्धालु जाम से हलकान रहे. दिन भर सिंहेश्वर बाजार में गाड़ियां रेंगती रही. जाम मे फंसे कई श्रद्धालुओं का सहरसा के लिए ट्रेन भी छूट गयी. जाम में फंसे श्रद्धालु भोले नाथ से फरियाद करते दिखे. जाम में फंसी पूर्णिया की […]
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सिंहेश्वर : जिले के सुप्रसिद्ध बाबा नगरी सिंहेश्वर स्थान में रविवार को दिन भर श्रद्धालु जाम से हलकान रहे. दिन भर सिंहेश्वर बाजार में गाड़ियां रेंगती रही. जाम मे फंसे कई श्रद्धालुओं का सहरसा के लिए ट्रेन भी छूट गयी.
जाम में फंसे श्रद्धालु भोले नाथ से फरियाद करते दिखे. जाम में फंसी पूर्णिया की शांति देवी ने कहा कि सर्वधर्म महासम्मेलन में भाग लेने आयी हूं. लेकिन सिंहेश्वर में ऐसा जाम लगता है, यह मालूम नहीं था. मधेपुरा जाने के लिए करीब तीन घंटे तक शांति देवी जाम में फंसी रही. वहीं सुपौल के मुरारी प्रसाद ने सिंहेश्वर नाथ से फरियाद करते हुए कहा कि बाबा आब अहीं करियोक सिंहेश्वर में जाम के उपाय.
जाम का आलम यह था कि सहरसा से ट्रेन पकड़ने के लिए लोगों को सिंहेश्वर से गम्हरिया के रास्ते घैलाढ बैधनाथपुर होते हुए सहरसा जाना पड़ा. सिंहेश्वर से सहरसा के लिए मात्र तीनस किलोमीटर की दूरी तय करनी थी, वहीं यात्रियों को पचास किलोमीटर की दूरी तय कर सहरसा पहुंचना पड़ा. वहीं जाम के कारण सिंहेश्वर दुर्गा चौक से रमाणी टोला होते भेलवा तक जाने वाली सड़क पर अचानक दवाब बढ गया. इससे वहां भी जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी.
इसके बाद श्रद्धालु के पास जाम से निकलने का कोइ चारा नहीं बचा. पदाधिकारी क्यों नहीं करते अपनी नजरें इनायत : बाबा नगरी सिंहेश्वर में प्रत्येक सप्ताह रविवार, सोमवार को जहां श्रद्धालु की भारी भीड़ उमड़ती है, वहीं बुधवार को मवेशी हाट रहने के कारण मवेशी व्यापरियों का आवागमन रहता है. इसके अलावे हर वर्ष सावन, भादो, महाशिवरात्रि मेला के अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं यहां जूटते है.
इन सबके बवाजूद सिंहेश्वर में जाम की समस्या के निदान को लेकर कोई कारगर योजना नहीं बनायी गयी है. जबकि मधेपुरा सहित सुपौल एवं सहरसा जिले के अनूमन सभी वरीय पदाधिकारी बाबा के दरबार में माथा टेकने पहुंचते है. यहां माथा टेकने वाले पदाधिकारी क्यों नहीं अपनी नजरे इनायत करते है एक बड़ा सवाल है.
बढ़ गयी आबादी, सिकुड़ गयी सड़कें : सिंहेश्वर में जाम की समस्या विगत कुछ वर्षों से विकराल रूप धारण कर ली है. समय के साथ आबादी तो बढी लेकिन संसाधन हीं. साथ ही कुछ वर्ष पहले सड़के काफी चौरी थी वह सिकुड़ कर छोटी होती चली गयी. सिंहेश्वर में पार्किंग की समूचित व्यवस्था नहीं है.
मुख्य सड़क से लेकर बैंक रोड, मंदिर रोड में लोग बीच सड़क पर वाहन खड़ी कर बाजार करते है. रही सही कसर सड़क पर सज रही दुकानें पुरी कर रही है. जब तक बायपास की व्यवस्था नहीं होती है तब तक सिंहेश्वर में सड़क पर अतिक्रमण खाली करा कर पार्किंग की समूचित सुविधा होने से कुछ हद तक जाम की समस्या से निजात लोगों को मिल सकता है.
जिले के सिंहेश्वर बाजार में राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए जाम आदत सी बन गयी है. यहां प्रतिदिन जाम की समस्या से लोगों को रूबरू होना पड़ता है. जबकि धार्मिक व व्यवसायिक दृष्टिकोण से सिंहेश्वर का कोसी क्षेत्र में अलग महत्व है. विगत कुछ वर्षों का आकलन करे तो सिंहेश्वर के कई गल्ला व्यवसायी अन्य स्थान पर पलायन कर गये है. गौरतलब है कि राज्य स्तर व्यापरिक मंडियों में सिंहेश्वर स्थान की अपनी एक साख है. सिंहेश्वर से पलायन कर अन्य जगहों से व्यापार कर रहे व्यापारी सिंहेश्वर मंडी के नाम से ही व्यवसाय कर रहे है. दुखद यह है कि सिंहेश्वर की अर्थव्यवस्था इनसे वंचित रह गयी है.
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