चचरी पुल पर टिका है एक गांव

Published at :19 Dec 2014 11:26 AM (IST)
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चचरी पुल पर टिका है एक गांव

कोरलाही गांव के लोग आवागमन के लिए चचरी पुल पर हैं निर्भर कुमारखंड : जिले के कुमारखंड प्रखंड में पांच हजार की आबादी वाला बिशनपुर कोरलाही पंचायत स्थित कोरलाही गांव के लोग चचरी पुल के सहारे आवागमन के लिए विवश हैं. एक अदद पुल के लिए ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों के पास […]

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कोरलाही गांव के लोग आवागमन के लिए चचरी पुल पर हैं निर्भर
कुमारखंड : जिले के कुमारखंड प्रखंड में पांच हजार की आबादी वाला बिशनपुर कोरलाही पंचायत स्थित कोरलाही गांव के लोग चचरी पुल के सहारे आवागमन के लिए विवश हैं. एक अदद पुल के लिए ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों के पास गुहार लगायी लेकिन सब बेकार रहा. जिले की एक प्रमुख नदी सुरसर कुमारखंड प्रखंड से हो कर गुजरती है. वर्ष 2008 में कोसी नदी ने सुरसर नदी को ही अपनी मुख्य धारा बनाया था और कुमारखंड प्रखंड में कहर बरपाया था. उस दौरान भी बिशनपुर कोरलाही पंचायत बुरी तरह प्रभावित हुआ था.
चंदा कर बनाते हैं चचरी पुल . बिशनपुर कोरलाही पंचायत के केवटगामा चौक से रानी पट्टी बेलारी होते हुए मधेपुरा तक जानेवाली सड़क में कोरलाही गांव के समीप सुरसर नदी में पुल नहीं है. गांव के लोग इसके कारण काफी कठिनाई का सामना करते हैं. ग्रामीण रीतेश कुमार ने बताया कि जब चचरी टूटने की स्थिति में होता है तो ग्रामीण आपस में चंदा कर चचरी का निर्माण करते हैं. ऐसा प्रत्येक वर्ष होता है. बरसात में नदी में उफान आने से चचरी ध्वस्त हो जाती है. इस दौरान वे कैद हो जाते हैं.
नदी पार है स्कूल आशंकित रहते हैं अभिभावक . एक माह पूर्व आठ वर्षीय बच्ची की मौत नदी में गिर जाने के कारण हो गयी थी. वह चचरी पुल के जरिये विद्यालय जा रही थी. विद्यालय नदी के उस पार है. गांव के बच्चे चचरी पुल ठीक रहा तो इसके जरिये अन्यथा बस्ते को सिर पर लेकर नदी के पानी से होकर विद्यालय जाते हैं. अभिभावक इसके कारण हमेशा चिंता में रहते हैं कि न जाने कब कौन सी घटना घट जाये.
लगायी गुहार, पर बेकार. गांववालों ने जनप्रतिनिधियों को पुल के लिए कई बार आवेदन दिया लेकिन यह बेकार रहा. चुनाव के समय तो आश्वासन मिलता है लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ. पिछले दो पीढ़ियों से लोग चंदा लगा कर अपनी मेहनत से बनाये चचरी के सहारे नदी के उस पार जाते हैं. वहीं गांव के वासुदेव पासवान, सूरज कुमार, शंभु सिंह, मंजू देवी, प्रमीला देवी, गरभु पासवान, वासुदेव पासवान, टिरण पासवान, चनानंद्र सिंह आदि ने बताया कि यदि हमारे गांव में रात में कोई बीमार हो जाये तो कुछ नहीं कर पाते हैं. कई लोग दम भी तोड़ देते हैं. पूर्व सब इंस्पेक्टर गुरुदेव सिंह, कुंदन कुमार, पंकज कुमार, वार्ड सदस्य मनीष साह सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि यहां पुल बन जाये तो उनका जीवन बदल जायेगा.
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