हाड़ कंपकपा देने वाली ठंड पर न अलाव न ही कंबल

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भभुआ सदर : हाड़ कंपा देनेवाली हवा और 12 से 13 डिग्री पर गिरे तापमान में जब लोग हीटर और रजाई के साथ घरों में दुबके होते हैं तो एक दुनिया ऐसी भी होती है जहां फुटपाथ पर फटे-पुराने कंबल और चादरों से लोग कड़ाके की ठंड का मुकाबला करते हैं. कोई एक शॉल में […]

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भभुआ सदर : हाड़ कंपा देनेवाली हवा और 12 से 13 डिग्री पर गिरे तापमान में जब लोग हीटर और रजाई के साथ घरों में दुबके होते हैं तो एक दुनिया ऐसी भी होती है जहां फुटपाथ पर फटे-पुराने कंबल और चादरों से लोग कड़ाके की ठंड का मुकाबला करते हैं. कोई एक शॉल में तो कोई एक फटे हुए कंबल में सर्दी से दो-दो हाथ करता दिखता है. ठंड जितना इंसान को सताती है उतना ही जानवरों की. इंसान तो फिर भी कोई जुगत भिड़ा लेता है लेकिन पशु क्या करें. संसाधनहीन लोग तो प्रशासन की ओर आस लगाये बैठे रहते हैं लेकिन लगता है कि इस बार प्रशासन भी रजाई ताने सोया हुआ है. शहरभर में आपदा विभाग के कार्यों को ढूंढने और नगर पर्षद के अलाव जलाने की हकीकत को जानने प्रभात खबर की टीम भी देर रात सड़कों पर निकली. नप दावा कर रहा है कि शहर के 13 स्थानों पर अलाव जलाये जा रहे हैं लेकिन प्रभात खबर को एक भी अलाव नहीं दिखा.
रात 10:20 बजे अखलासपुर बस स्टैंड
प्रभात खबर की टीम अखलासपुर बस स्टैंड पहुंची तो अखलासपुर स्टैंड स्थित एक चौकी पर चादर ओढ़ कर सो रहे अरविंद बिंद दिखे. दूर से लगता था कि सामान की गठरी रखी हुई है. जगाने पर वह बताने लगे कि नींद नहीं आती है, सारी रात चादर से छन-छन कर ठंडी हवा आती है और उससे मुकाबला करने में ही सुबह हो जाती है. स्टैंड के दक्षिणी छोर पर कमता के हीरा सिंह के होटल पर कुछ लोग खड़े होकर चूल्हे की आग तापते मिले. आग तापती किन्नर सोनी कुमारी और मोनी ने बताया कि उन्हें मोहनिया ट्रेन पकड़ने जाना है, लेकिन उनकी गाड़ी छूट गयी. अब रात काटनी है अगर कहीं आग जलती रहती तो रात गुजार लिया जाता, लेकिन स्टैंड में कहीं भी नगरपालिका ने आग जलाने का प्रबंध नहीं किया है.
रात 10:40 बजे सब्जी मंडी रोड
स्टेट बैंक के समीप सब्जी मंडी मुख्य सड़क पर रिक्शाचालक महुला परसिया के मुन्ना राम, मोकरी के कपिलमुनि, गौसैलीपुर के रामाकांत यादव कूड़े की ढेर इकट‍्ठा कर आग तापते मिले. पहले तो सभी कैमरा और पूछताछ करते देख सकपका गये लेकिन दूसरे ही पल अपना सारा दर्द बयां कर दिया. उन्होंने कहा, साहब आप लोग खुद देख लीजिए कि हमलोग पापी पेट के लिए कैसे रात गुजार रहे हैं. उनका कहना था कि चार दिन पहले नगर पर्षद ने कुछ लकड़ियां जलायी थीं, वह घंटे भी नहीं जली.
रात 10:55 बजे एकता चौक
एकता चौक को शहर का ह्रदयस्थली कहा जाता है. यहां देर रात तक चहलपहल रहती है लेकिन यहां नगर प्रशासन और आपदा विभाग की ओर से यहां भी अलाव की व्यवस्था नहीं दिखी. वहां कूड़ा इकट्ठा कर आग तापते मिले अंडा विक्रेता महेंद्र राम, वार्ड 14 के जमुना राम, मड़ैचा के रिक्शा चालक अजय राम, मजदूर शिव मंजिल केटारी आदि का कहना था कि इतनी ठंड पड़ रही है कि हाथ भी सुन्न हो जा रहे हैं लेकिन, न तो अब तक कंबल ही मिले और न ही अलाव की व्यवस्था ही की गयी.
रात 11:10 बजे, पूरब पोखरा बस स्टैंड
रात गहराती जा रही थी और इसी के साथ ठंड ने भी प्रचंड रूप ले लिया था. पूरब पोखरा बस स्टैंड पर सन्नाटा पसरा हुआ था. इस स्टैंड में भी चारों तरफ नजर दौड़ाने पर कहीं भी अलाव जलता नहीं मिला. स्टैंड के एक कोने में रिक्शा खड़ी कर उस पर फटा कंबल तान सोने की कोशिश कर रहे रिक्शा चालक कपिल मुनि को जगाया गया तो उसका पहला सवाल था-कहां चलना है. जब उन्हें बताया गया कि उनका हाल जानने आये हैं तो वे बोल उठे- गरीबन खातिर सरकार कुछो भेजेला उ सब चोखन के हाथ भेंटा जाला एहिसे गरीब आदिमियन के पास कौनो सुविधा नइखे पहुंचत.
रात 11:25 बजे सदर अस्पताल
सदर अस्पताल में भी अलाव जलता नहीं दिखा. अस्पताल परिसर में ही बनी बच्चों के लिए गहन चिकित्सा इकाई(एसएनसीयू) के बाहर शेड में लोग रात बिताते और भारी ठंड के बीच फर्श पर ही लेटे और बैठ कर आपस में बात कर ठंड भगाते मिले. महेंसुआ के केशव राम का कहना था कि वह चार दिन से अस्पताल में हैं, लेकिन आग जलना तो दूर नवजात के परिजनों के लिए कंबल की भी व्यवस्था नहीं की गयी है.
अस्पताल के चबूतरे के समीप रिक्शा लगा कर सोये तमाड़ के रिक्शा चालक सुदर्शन राम और हटाढ़ी के सुकर राम का कहना था कि रिक्शे की कमाई से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलता है, लेकिन ठंड इतनी पड़ रही है कि मन में आता है कि रिक्शा चलाना छोड़ घर चले जायें, लेकिन घर चले जाने से पेट कैसे भरेगा.
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