Jamui Sadar Hospital Crisis: जमुई जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल में ऑक्सीजन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. अस्पताल परिसर में लगे दोनों ऑक्सीजन प्लांट पिछले करीब एक सप्ताह से खराब पड़े हैं. इसके कारण इमरजेंसी सहित कई वार्डों में मरीजों को सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन दी जा रही है. गंभीर मरीजों के इलाज में हो रही परेशानी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
करोना के समय में लगा था करोड़ों का प्लांट
कोरोना काल के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की पहल पर सदर अस्पताल में 500 एलपीएम और 950 एलपीएम क्षमता वाले दो आधुनिक ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे. इन प्लांटों के जरिए अस्पताल के अलग-अलग वार्डों तक पाइपलाइन से ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था की गई थी. उद्देश्य था कि मरीजों को बिना रुकावट तत्काल ऑक्सीजन मिल सके. लेकिन रखरखाव में लापरवाही और तकनीकी खराबी के कारण दोनों प्लांट बंद हो गए हैं.
सिलेडर के सहारे चल रही इमरजेंसी
स्थिति यह है कि इमरजेंसी वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को सिलेंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है. अस्पताल कर्मियों को हर दो घंटे में सिलेंडर बदलना पड़ रहा है. इससे स्वास्थ्यकर्मियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है और मरीजों की परेशानी भी लगातार बढ़ रही है.
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाए जा रहे हैं. इसको लेकर विभागीय स्तर पर सांठगांठ और कमीशनखोरी की चर्चा भी तेज हो गई है. आरोप है कि सिलेंडर सप्लाई में मोटे कमीशन के कारण प्लांट के रखरखाव को गंभीरता से नहीं लिया जाता. हालांकि इस मामले की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है.
जानकारी के मुताबिक अस्पताल में लगे दोनों ऑक्सीजन प्लांट की देखरेख के लिए सिर्फ एक कर्मी की तैनाती की गई है. तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े प्लांट के संचालन के लिए कम से कम चार प्रशिक्षित कर्मियों की जरूरत होती है. स्टाफ की कमी को भी प्लांट खराब होने की बड़ी वजह माना जा रहा है.
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा
सदर अस्पताल के प्रबंधक रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी खराबी आई है. टेक्निशियन को बुलाया गया है और उसके पहुंचते ही मरम्मत का काम पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि एक-दो दिनों के भीतर दोनों प्लांट फिर से चालू कर दिए जाएंगे.
