दल्लिी में दिखेगी गांधी की चंपारण सत्याग्रह की झांकी

Updated at :13 Jan 2016 7:25 PM
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दल्लिी में दिखेगी गांधी की चंपारण सत्याग्रह की झांकी

दिल्ली में दिखेगी गांधी की चंपारण सत्याग्रह की झांकी राज्य सरकार ने भी 2017 में विशेष आयोजन करने का लिया है फैसलाविशेष संवाददाता, पटना गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी, 2016 को दिल्ली में दिखायी जाने वाली झांकी में बिहार की दमदार उपस्थिति होगी. राजमार्ग पर हजारों लोगों की मौजूदगी में सौ साल पुराने […]

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दिल्ली में दिखेगी गांधी की चंपारण सत्याग्रह की झांकी राज्य सरकार ने भी 2017 में विशेष आयोजन करने का लिया है फैसलाविशेष संवाददाता, पटना गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी, 2016 को दिल्ली में दिखायी जाने वाली झांकी में बिहार की दमदार उपस्थिति होगी. राजमार्ग पर हजारों लोगों की मौजूदगी में सौ साल पुराने महात्मा गांधी की चंपारण सत्याग्रह जीवंत रूप में नजर आयेगा. बिहार सरकार ने इस बार गण्तंत्र दिवस की परेड बाद दिखायी जाने वाली झांकी में 1917 के चंपारण आंदोलन की थीम निर्धािरत किया है. बिहार सरकार द्वारा भेजी गयी महात्मा गांधी की चंपारण सत्याग्रह की थीम को सेलेक्ट कर लिया है. बिहार की झांकी में 1917 का चंपारण सत्याग्रह का जीवंत रूप दिखाया जायेगा, जिसमें गांधी जी के पटना आने, उनके चंपारण पहुंचने और इसके बाद की पूरी कहानी होगी. 26 जनवरी को देश-विदेश के मेहमानों के समक्ष बिहार की यह झांकी पेश होगी और देश-विदेश के लोग सौ साल पहले महात्मा गांधी के चंपारण आने और उनके सत्याग्रह की जीवंत झांकी देख सकेंगे. केंद्र की सहमति के बाद राज्य सरकार ने इसकी तैयारी आरंभ् कर दी है. राज्य सरकार ने भी चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पर अगले वर्ष 2017 में विशेष आयोजन करने का फैसला लिया है. गणतंत्र दिवस की झांकी में महात्मा गांधी के युवा रूप को दर्शाया गया है. ट्रैक्टर पर बने मंच पर नील की खेती करते हुए किसानों को दिखाया जायेगा. अंग्रेज यहां के किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर करते थे. मंच पर तीन कठिया प्रथा, राज कुमार शुक्ल के साथ महात्मा गांधी का 10 अप्रैल, 1917 को बिहार पहुंचना और चंपारण सत्याग्रह को लेकर विचार विमर्श किया जाना भी दिखेगा. मंच पर ही गरीब किसानों के खिलाफ अंग्रेजों की क्रूरता को तसवीरों में दिखलाया गया है. इसके बाद की पूरी कहानी झांकी में दिखलायी गयी है. 16 अप्रैल, 1917 को गांधी जी के चंपारण पहुंचने, मोतिहारी के तत्कालीन एसडीओ का फरमान और उस आदेश को मानने से इनकार करने की कहानी भी झांकी में दिखायी जायेगी. गांधी जी के चंपारण के जिलाधिकारी को यह बताना कि वह जब तक किसानों की समस्या सुलझ नहीं जाती तब तक वह यहां से नहीं जायेंगे, गांधी जी को देखने कोर्ट में भारी भीड़ जमा होने और कहना कि उन्हें यहां आने के लिए जो भी दंड मिलेगा, मंजूर होगा का भी चित्रण किया जायेगा.

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