गौतम बुद्ध महिला कॉलेज के हिन्दी विभाग की ओर से सावित्री महाजन सभागार में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की कालजयी रचना ‘अंधेर नगरी’ का पहली बार छात्राओं द्वारा रंगमंचीय और साहित्यिक मंचन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत गीत के साथ हुई. इस दौरान कॉलेज की प्राचार्य डॉ सीमा पटेल, मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी शम्भू सुमन और विशिष्ट अतिथि डॉ प्रदीप कुमार मौजूद रहे.
छात्राओं के अभिनय की अतिथियों ने की सराहना
प्राचार्य डॉ सीमा पटेल ने छात्राओं के अभिनय की सराहना करते हुए उनके उत्साह और प्रतिभा की प्रशंसा की. वरिष्ठ रंगकर्मी शम्भू सुमन ने कहा कि छात्राओं ने पूरे नाटक में ऊर्जा के साथ अभिनय किया. उन्होंने कहा कि छात्राएं भविष्य में इस नाटक के साथ राष्ट्रीय स्तर की ‘भारंगम’ प्रतियोगिता में भी हिस्सा ले सकती हैं.
भारतेन्दु के व्यंग्य और प्रहसन पर हुई चर्चा
विशिष्ट अतिथि डॉ प्रदीप कुमार ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के व्यंग्य और प्रहसन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने छात्राओं के प्रभावी अभिनय की भी सराहना की. नाटक का निर्देशन हिन्दी विभाग के रंगमंच ‘मंडपम्’ के माध्यम से डॉ प्यारे मांझी ने किया, जबकि सह-निर्देशन डॉ सुरबाला कृष्णा और डॉ सुनीता कुमारी ने किया.
इन छात्राओं ने निभायीं अलग-अलग भूमिकाएं
नाटक में दीप शिखा, डॉली, मानसी, स्नेहा, रेशमी, खुशबू, जिया, प्रियांशी, रिया, सोनाली, शैली, सुहानी, अनुष्का, श्वेता, अंजलि, ज्योति और सोनम ने विभिन्न भूमिकाओं में प्रभावी अभिनय किया. छात्राओं के मंचन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया.
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर निबंध प्रतियोगिता में दिखी प्रतिभा
‘विकसित भारत@2047’ पर छात्राओं ने रखे विचार
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की ओर से निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी. प्राचार्य डॉ सीमा पटेल के मार्गदर्शन में आईक्यूएसी के तत्वावधान में हुई प्रतियोगिता का संयोजन मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रीति शेखर ने किया. प्रतियोगिता का विषय ‘विभिन्न संदर्भ, साझा आकांक्षाएं: विकसित भारत@2047 के लिए भारत के युवाओं को सशक्त बनाना’ रखा गया.
800 शब्दों तक में लिखे विकसित भारत के सपने
कॉलेज के विभिन्न विभागों की छात्राओं ने उत्साह के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. छात्राओं ने निबंध के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका और जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे. निबंध की शब्द सीमा 600 से 800 शब्द निर्धारित की गयी थी और इसके लिए एक घंटे का समय दिया गया. छात्राओं को हिंदी या अंग्रेजी में निबंध लिखने की अनुमति थी.
निर्णायक मंडल में शामिल रहे कई शिक्षक
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में हिन्दी विभाग की डॉ सुनीता कुमारी और डॉ सुरबाला कृष्णा तथा अंग्रेजी विभाग की डॉ अफ्शां नाहिद और डॉ शबाना परवीन हुसैन शामिल रहीं. आयोजन सचिव डॉ प्रमिला कुमारी, डॉ सीता और डॉ शुचि सिन्हा ने प्रतियोगिता के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
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