दलाई लामा ने दिया शिक्षा पर जोर

Updated at :15 Jan 2017 4:53 AM
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दलाई लामा ने दिया शिक्षा पर जोर

कालचक्र पूजा के समापन पर कहा-भारत उनका गुरु है बोधगया : कालचक्र पूजा के समापन समारोह में दलाई लामा ने कहा कि शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए. नालंदा विश्वविद्यालय का बेहतर ढंग से पुनरोद्धार कर यहां बौद्ध शिक्षा का व्यापक इंतजाम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि नालंदा परंपरा के तहत 17 बौद्ध विद्वानों […]

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कालचक्र पूजा के समापन पर कहा-भारत उनका गुरु है

बोधगया : कालचक्र पूजा के समापन समारोह में दलाई लामा ने कहा कि शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए. नालंदा विश्वविद्यालय का बेहतर ढंग से पुनरोद्धार कर यहां बौद्ध शिक्षा का व्यापक इंतजाम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि नालंदा परंपरा के तहत 17 बौद्ध विद्वानों द्वारा रचित ग्रंथों का अध्ययन किया जाना चाहिए. साथ ही विभिन्न धर्मों के ग्रंथों का भी मनन करना चाहिए. यह ठीक रहेगा. मन को मंदिर बनायें, मन को शांति प्रदान करने वाले कार्य करें. आप कर सकते हैं. उन्होंने बुद्ध की तीन शिक्षा-प्रेम, करुणा व मैत्री का पालन करने को कहा. दलाई लामा ने कहा कि तिब्बत में भारत से ही बौद्ध धर्म गया था. भारत तिब्बत का गुरु है,
पर यहां ध्यान नहीं दिये जाने के कारण शिष्य ही इस मामले में गुरु से आगे निकल चुका है. हमने बौद्ध ग्रंथों को सहेज कर रखा. धर्मगुरु ने बौद्ध मठों के निर्माण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़े-छोटे मठों के चक्कर में पड़ने से बेहतर है कि बौद्ध मठों में बौद्ध शिक्षा के साथ ही विज्ञान व मनोविज्ञान की भी शिक्षा दी जाये. दक्षिण भारत के बौद्ध मठों में यह जारी है. उन्होंने कहा कि मंदिर-मूर्ति की स्थापना के साथ-साथ उसे अध्ययन के केंद्र के रूप में स्थापित करें. केवल श्रद्धा से व पूजा-पाठ करने से नहीं,
बल्कि धर्म का अध्ययन करने की आवश्यकता है. मुख्य रूप से हिमालयन क्षेत्र के लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है. कालचक्र पूजा में शामिल व लाइव प्रसारण देखनेवालों को दलाई लामा ने कहा कि दीक्षा के दौरान उनके द्वारा कही गयी बातों का पालन करें. धर्म परिवर्तन की जरूरत नहीं है, चित का परिवर्तन करें. सीएम द्वारा बोधगया में कालचक्र पूजा का फिर से आयोजन कराने के आग्रह पर उन्होंने कहा कि आप शत-प्रतिशत गारंटी दें, कालचक्र पूजा में प्रवचन करने को वह तैयार हैं. अंत में उन्होंने बिहार के सीएम, जिला प्रशासन के अधिकारियों व स्थानीय लोगों को धन्यवाद दिया. इससे पहले कालचक्र मैदान में मौजूद श्रद्धालुओं ने खादा भेंट कर दलाई लामा की लंबी उम्र की कामना की. दलाई लामा ने भी विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया.
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