जाले, दरभंगा से केशवेन्द्र प्रताप ठाकुर की रिपोर्ट
Gautam Kund: मलमास की समाप्ति के बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रवाह लगातार जारी है. जाले प्रखंड के ब्रह्मपुर पश्चिमी पंचायत स्थित पौराणिक एवं धार्मिक महत्व के महर्षि गौतम आश्रम (गौतम कुंड) में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाने के साथ श्री सीताराम जी, गौतमेश्वर महादेव और पूज्य महाराज के समाधि स्थल पर पूजा-अर्चना कर रहे हैं.
14 जून से गौतम कुंड में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं.
क्या है गौतम कुंड का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
गौतम कुंड दरभंगा जिले के जाले प्रखंड के ब्रह्मपुर गांव में खिरोई नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान प्राचीन भारतीय दार्शनिक एवं न्याय दर्शन के प्रवर्तक महर्षि अक्षपाद गौतम के आश्रम से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि महर्षि गौतम ने यहीं अपने शिष्यों को न्याय शास्त्र की शिक्षा दी थी.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गौतम कुंड वह स्थान है, जहां महर्षि गौतम प्रतिदिन स्नान और ध्यान किया करते थे. इसी कारण इसे गौतमी गंगा और पाताल गंगा के नाम से भी जाना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस कुंड में स्नान करने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है और पुण्य लाभ मिलता है.
गौतम आश्रम के निकट स्थित अहिल्या स्थान का भी विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि यह स्थान महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या से जुड़ा हुआ है. माघी पूर्णिमा समेत विभिन्न धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.
पाताल गंगा के नाम से प्रसिद्ध है गौतम कुंड
गौतम कुंड के मुख्य पुजारी राम कृपाल दास ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास के दौरान देवी-देवताओं का विशेष वास इस क्षेत्र में माना जाता है. इसी वजह से हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
उन्होंने बताया कि गौतम कुंड को “पाताल गंगा” के नाम से भी जाना जाता है. स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां गंगा की धारा भूमिगत रूप से प्रवाहित होती है, जिसके कारण इस स्थल का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.
स्नान और पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
मुख्य पुजारी के अनुसार धार्मिक ग्रंथों में गंगा स्नान को पापों के नाश, पितरों की तृप्ति, मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति से जोड़ा गया है. इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु गौतम कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आने से उन्हें आध्यात्मिक शांति और धार्मिक संतोष की अनुभूति होती है.
आश्रम परिसर में बढ़ी धार्मिक गतिविधियां
मलमास समाप्त होने के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है. लगातार बढ़ रही भीड़ के कारण आश्रम परिसर में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. सुबह से शाम तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है.
पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखा जा रहा है.
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