हाल अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का

Published at :05 Sep 2016 7:01 AM (IST)
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हाल अतिरिक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का

आयुष चिकित्सक के सहारे पूरा स्वास्थ्य केंद्र एक्स-रे तक की सुविधा नहीं दरभंगा/बिरौल : संसाधन और चिकित्सक के अभाव में तीन करोड़ की लागत से बना समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र दम तोड़ रहा है. दवा भी जिला से उपल्बध नहीं किया जा रहा है. ऐसे में गम्भीर मरीज को ईलाज किये बिना डीएमसीएच रेफर कर दिया […]

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आयुष चिकित्सक के सहारे पूरा स्वास्थ्य केंद्र

एक्स-रे तक की सुविधा नहीं
दरभंगा/बिरौल : संसाधन और चिकित्सक के अभाव में तीन करोड़ की लागत से बना समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र दम तोड़ रहा है. दवा भी जिला से उपल्बध नहीं किया जा रहा है.
ऐसे में गम्भीर मरीज को ईलाज किये बिना डीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है. एक्स-रे मशीन भी खराब पड़े हुए हैं. लोगों को बाहर से एक्स-रे करना पड़ता है. पीएचसी प्रभारी और स्वास्थ्य प्रबंधक के झगड़े में दर्जनों कर्मी का वेतन करीब एक वर्ष से लंबित पड़ा हुआ है. यह मामला न्यायालय तक पहुंच गया है. ऐसी स्थिति में दूर-दराज से पहुंचे मरीज या तो प्राईवेट में उपचार करवाते हैं या फिर दरभंगा ईलाज करवाने चले जाते हैं.
एक वर्ष से एक्स-रे मशीन खराब
समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक्स-रे मशीन करीब एक वर्ष से खराब पड़ा हुआ है. इससे दूर-दराज से पहुंचे लोगों को दो सौ रूपये देकर बाहर से एक्स-रे करवाना पड़ता है. इससे सबसे अधिक समस्या गरीब परिवार के मरीजों को होती है. सरकार द्वारा मुफ्त उपचार इनके लिए यहां महज घोषणाओं तक ही सीमित है.
आयुष चिकित्सक के भरोसे इलाज: समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर जहां विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती होनी थी वहां आयुष चिकित्सक के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया गया है. इन्हीं के द्वारा बीमारों का उपचार होता है. लिहाजा सर्दी-जुकाम, सामान्य बुखार सीरेखे रोगों का ही यहां इलाज हो पाता है.
अगर गम्भीर बीमारी से ग्रस्त कोई मरीज आते हैं तो उन्हें सीधे डीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है. मालूम हो कि अतिरिक्त समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 9 चिकित्सक के पद हैं. इसमें तीन आयुष चिकित्सक और मात्र एक एमबीएस हैं. वही अनुमंडल अस्पताल में पांच चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति की गयी है.
संसाधनों की है कमी, रेफर मजबूरी
चरमरायी स्वास्थ्य व्यवस्था को आगमन के दिन से ही व्यवस्थित करने में जुटे हैं. इसमें थोड़ी सी कठिनाई तो झेलनी ही पड़ती है, लेकिन जो गम्भीर मरीज आते हैं उसे संसाधन के अभाव में डीएमसीएच रेफर कर देना मजबूरी है.
वीपी द्विवेदी, पीएचसी प्रभारी बिरौल
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