कैंपस-सामाजिक आत्मा के प्रतिबिंब थे उमा बाबू

Published at :07 Jan 2016 8:08 PM (IST)
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कैंपस-सामाजिक आत्मा के प्रतिबिंब थे उमा बाबू

कैंपस-सामाजिक आत्मा के प्रतिबिंब थे उमा बाबू फोटो-18 व 19परिचय- जयंती समारोह को संबोधित करते विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी एवं उपस्थित लोग.दरभंगा. महाराज महेश ठाकुर कॉलेज परिवार की ओर से डा. उमाकांत चौधरी की 83वीं जयंती समारोह आयोजित की गई. कार्यक्रम में मौजूद बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि डा. उमाकांत चौधरी सामाजिक […]

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कैंपस-सामाजिक आत्मा के प्रतिबिंब थे उमा बाबू फोटो-18 व 19परिचय- जयंती समारोह को संबोधित करते विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी एवं उपस्थित लोग.दरभंगा. महाराज महेश ठाकुर कॉलेज परिवार की ओर से डा. उमाकांत चौधरी की 83वीं जयंती समारोह आयोजित की गई. कार्यक्रम में मौजूद बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने कहा कि डा. उमाकांत चौधरी सामाजिक आत्मा के प्रतिबिंब थे. वर्त्तमान राजनीति में उसी को सफलता माना जाता है. जो राजनेता बनने मेें सफल होते हैं. उन्होंने कहा कि वर्त्तमान दिनों में समाज आगे और सामाजिकता पीछे छुट रहा है. इनसान आगे और इंसानियत पीछे छुट रहा है. उन्होंने इस परिस्थिति में उमा बाबू के व्यक्तित्व को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि बदलती राजनीति के दौर में ऐसे विचारों को रखना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है. लेकिन जीवन में इस सच्चाई को उतारकर उमा बाबू में इसे सहजता से न केवल स्वीकार किया बल्कि मिसाल भी कायम की. जरूरत है कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समवेत प्रयास से हम आदर्श राजनीति व समाज सेवा को अक्षुण्ण रखें. श्री चौधरी ने स्वच्छ राजनीति के लिए मतदाताओं से जागरूक होने का आह्वान करते हुए कहा कि उनका भी दायित्व बनता है कि वे मतदान से पूरी तरह कसौटी पर कस बेदाग छवि वाले को ही लोकतंत्र के मंदिर में भेजें. इस अवसर पर प्रो. चौधरी के प्रति श्रद्धा निवेदित करते हुए खाद्य आपूर्ति मंत्री मदन सहनी ने कहा कि उनकी सहृदयता व सादगी को हम सभी अपने जीवन में उतारें. कारण वर्तमान में इसका समाज में अभाव होता जा रहा है. हम समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए हमलोगों की यह नैतिक जिम्मेवारी बनती है. श्री सहनी ने उमा बाबू के साथ गुजारे लम्हों की भी चर्चा की. वहीं पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत ने प्रो. चौधरी के आदर्शों पर चलने की अपील की. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डा. देवनारायण झा ने संबद्ध कॉलेजों के शिक्षा कर्मियों की समस्याओं को इंगित करते हुए कहा कि जब तक समाज के शिक्षक भूखे रहेंगे, तबतक समाज आगे नहीं बढ़ सकता है. जिस राष्ट्र में शिक्षक का सम्मान नहीं होगा, वह राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता है. विद्या और संस्कृति में समाज राज्य और राष्ट्र आगे बढ़े इसका प्रयास करना चाहिए. प्रो. चौधरी को इंगित करते हुए कहा कि संसार में वही जीवित रहते हैं जिनका यश, चरित्र और विचार जीवित रहता है. उन्होंने कहा कि समाज के हित के लिए प्रो. चौधरी की विचारधारा को कार्यान्वित करवाना ही उनके प्रति मूल श्रद्धांजलि होगी. समारोह की अध्यक्षता करते हुए लनामिवि कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा ने मिथिला विवि को केंद्रीय विवि का दर्जा दिलाने, विवि के डिग्री स्तरीय महाविद्यालयों से इंटर स्तरीय शिक्षा को अलग करने की मांग रखते हुए कहा कि इससे जहां करीब 5 हजार शिक्षकों को रोजगार श्रृजन का अवसर प्राप्त होगा. वहीं डिग्री स्तरीय शिक्षकों की इस बोझ से हटने की बाद की संचित ऊर्जा से यूजी एवं पीजी स्तरीय छात्रों के शिक्षा में गुणात्मक वृद्धि होगा. उन्होंने संबद्ध कॉलेजों के शिक्षा कर्मियों की समस्या के बाबत कहा कि बिहार के आधे से अधिक छात्रों की पढ़ाई इसी के सहारे हो पाती है. इसलिए इन शिक्षा कर्मियों की भलाई के लिए सरकार को न्याय संगत निर्णय इनके हित में लेना चाहिए. वहीं बकायादि एवं पेंशनादि मद मेें विवि को प्राप्त रकम वितरण करने में सरकार की ओर से उनके प्रमाण पत्र सत्यापन संबंधी लगाया गया. क्लाउज को समाप्त करवाने का भी आग्रह किया ताकि उसके लाभुकों को भुगतान करने में विवि प्रशासन को सहज हो. पूर्व विधान पार्षद डा. विनोद कुमार चौधरी ने प्रमंडल के सर्वांगीण विकास के राह की समस्या नीतीश कुमार तक पहुंंचाने का आग्रह किया. वहीं डा . विनय कुमार चौधरी ने संकल्प लेते हुए कहा कि झूठ और घूस से हमेशा दूर रहेंगे. अतिथियों का स्वागत विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने किया. वहीं डा. चौधरी ने मैथिली विषय के लिए नियोजित शिक्षकों की भी बहाली, राजकाज की भाषा मैथिली में किये जाने, संबद्ध कॉलेजों के शिक्षाकर्मियों की आर्थिक समस्या को दूर करने का आग्रह किया. संबोधन से पूर्व समारोह का उद्घाटन विधानसभाध्यक्ष सहित मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं प्रो. उमाकांत चौधरी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए किया. वहीं अतिथियों का स्वागत मिथिला परंपरानुसार किया गया. समारोह में डा. अरविंद कुमार झा, डा. रहमतुल्लाह, डा. उदय कांत मिश्र, डा. उपेंद्र कुमार, रामप्रवेश पासवान, सुनील भारती एवं अनिल बिहारी आदि मौजूद थे.

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