लोगों की बदली िदनचर्या कम खर्च से चला रहे काम
Updated at : 16 Nov 2016 2:40 AM (IST)
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रक्सौल : 500 व 1000 नोट पर सरकार के द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने के बाद इसका असर समाज के हर वर्ग पर हुआ है. अधिकारी से लेकर दैनिक मजदूर तक ने सरकार के फैसले के स्वागत अपने दैनिक खर्च में कटौती की है और कम से कम पैसे में अपना खर्च पूरा करने की कोशिश […]
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रक्सौल : 500 व 1000 नोट पर सरकार के द्वारा प्रतिबंध लगाये जाने के बाद इसका असर समाज के हर वर्ग पर हुआ है. अधिकारी से लेकर दैनिक मजदूर तक ने सरकार के फैसले के स्वागत अपने दैनिक खर्च में कटौती की है और कम से कम पैसे में अपना खर्च पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं.
इसको लेकर मंगलवार को प्रभात खबर की टीम ने अधिकारी वर्ग से लेकर मजदूर वर्ग के लोगों से बात की तो उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया कुछ इस प्रकार से दी है.
श्रीप्रकाश, एसडीओ, रक्सौल : दैनिक खर्च के लिए नोटबंदी के बाद दस हजार रुपया बैंक से निकाला हूं. पूर्व के खर्च की तरह अब खर्च में कटौती की है. पांच सौ के खर्च के जगह पर 100 से 150 रुपये में काम चलाया जा रहा है. सरकार की पहल अच्छी है. बैंकों में व्यवस्था सही रहे इसको लेकर हर तरह अनुमंडल प्रशासन तैयार है और बैंकों की गतिविधि की खबर ली जा रही है.
राकेश कुमार, डीएसपी, रक्सौल : जरूरत के हिसाब से खर्च कर रहा हूं. अधिक प्रयास यह है कि कम से कम पैसा खर्च हो. अति आवश्यक कार्य को कर रहा हूं. एक बार निकासी किये हैं उसी से काम चल रहा है. नोटबंदी का सरकार का फैसला काफी सही है. हमारे सहकर्मी भी दूरभाष पर बात होती है तो वे भी इस फैसले का सही बताते हैं.
सुनील कुमार, युवा, रक्सौल : नोट बंद होने के बाद से दैनिक लाइफ स्टाइल चेंज हो गया है. 100 रुपये भी खर्च करने में सोचना पड़ रहा है क्योंकि 100 रुपया लेने के लिए काफी परेशानी हो रही है. जरूरत के खर्च के हिसाब से पॉकेट में पैसा रखना हो रहा है अधिक खर्च करने की हिम्मत भी खत्म हो गयी है.
सोनू कुमार, व्यापारी, रक्सौल : नोट बंदी होने के बाद व्यापार पर काफी प्रभाव पड़ा है. व्यापार में कमी होने के बाद घर खर्च में भी कटौती हुयी है. हालांकि इससे यह फायदा भी हुआ है कि देश हित में अच्छा कार्य हो रहा है और बड़ा नोट होने से अधिक खर्च होता वह नहीं हो रहा है तो बचत भी हो रही है.
राजेश कुमार, दैनिक मजदूर, रक्सौल : अहिरवा टोला निवासी राजेश ने बताया कि नोट बंदी के बाद घर में रखे पैसे से घर का खर्च चलाया गया. तीन दिन मिली मजदूरी को काफी बचा-बचा कर खर्च कर रहा हूं. मजदूरी का पैसा भाई से भेजकर बैंक से बदलवाया हूं.
झोटी राम, ग्रामीण, मुसहरवा, भेलाही बाजार : पैसा बंद होने के बाद दैनिक दिनचर्या काफी बदल गयी है. छोटे-छोटे खर्च में काम चल रहा है. घर में एकत्रित कर रखे पैसे भेलाही चंपारण क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में लेकर गया लेकिन नहीं बदला गया. लोगों से सुन कर लगता है कि यह काम देशहित है, तो हम सभी भी हल्की परेशानी सह रहे हैं.
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