बिहार के सभी विश्वविद्यालयों इसी वर्ष से लागू होगा चार वर्षीय स्नातक कोर्स, कॉमन इंट्रेंस टेस्ट से होगा दाखिला

विश्वविद्यालयों को हिदायत दी गयी कि यूजीसी के विषय मेें 20 प्रतिशत अध्ययन सामग्री क्षेत्रीय रखी जा सकती है. बैठक में एकेडमिक कैलेंडर बनाने का निर्णय भी लिया गया. इसके अलावा आधारभूत संरचना और कोर्स को पढ़ाने वाली फैकल्टी के आकलन की बात भी कही गयी.
बिहार के विश्वविद्यालयों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत चार वर्षीय स्नातक कोर्स 2023- 2027 की पढ़ाई इसी साल से शुरू हो जायेगी. चार साल की स्नातक डिग्री में विद्यार्थी को आठ सेमेस्टर उत्तीर्ण करने होंगे. यह निर्णय कुलाधिपति राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर की अध्यक्षता में गुरुवार को राजभवन में आयोजित बैठक में लिया गया. इस बैठक में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह समेत सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद रहे. इस दौरान प्रथम वर्ष के लिए सिलेबस और कोर्स स्ट्रक्चर तैयार करने के लिए कमेटी गठित करने का निर्णय भी लिया गया है.
सीबीसीएस के तहत वर्षीय स्नातक स्तरीय एंट्री-एक्जिट कार्यक्रम का रोडमैप तैयार करने के लिए आयोजित बैठक में निर्णय लिया गया कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 से ही प्रथम वर्ष की पढ़ाई शुरू की जानी चाहिए. सहमति बनी कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 से ही विश्वविद्यालय अपने स्तर पर प्रवेश ले सकेंगे. विश्वविद्यालयों को एक ही समय पर सभी संबंधित कार्य पूरे करने होंगे. इसकी तिथि और टाइम लाइन राजभवन तय करेगा. विश्वविद्यालय अपनी मनमर्जी से दाखिला नहीं लेंगे.
प्रथम वर्ष के बाद अगले सत्र से सभी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए कॉमन इंट्रेंस टेस्ट लिया जायेगा. विश्वविद्यालयों को हिदायत दी गयी कि यूजीसी के विषय मेें 20 प्रतिशत अध्ययन सामग्री क्षेत्रीय रखी जा सकती है. बैठक में एकेडमिक कैलेंडर बनाने का निर्णय भी लिया गया. इसके अलावा आधारभूत संरचना और कोर्स को पढ़ाने वाली फैकल्टी के आकलन की बात भी कही गयी. कुलाधिपति अरलेकर ने सीबीसीएस/ सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने के निर्देश देते हुए कहा प्रक्रियाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करें. बैठक में शिक्षा विभाग के वैद्यनाथ यादव, राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल० चोंग्थू, बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के अकादमिक सलाहकार प्रो एनके अग्रवाल एवं अन्य अफसर मौजूद रहे.
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एंट्री-एक्जिक्ट स्नातक कार्यक्रम में यह व्यवस्था होती है कि उसे निर्धारित समय से पहले वह पाठ्यक्रम से बाहर हो सकता है. इस प्रोग्राम में विद्यार्थी को अध्ययन के हिसाब से अंक या सर्टिफिकेट दिये जाने हैं. उदाहरण के लिए पहले दो सेमेस्टर करने वाले विद्यार्थी को अंतर स्नातक सर्टिफिकेट दिया जायेगा. चार सेमेस्टर करने वाले विद्यार्थी को यूजी डिप्लोमा, छह सेमेस्टर करने वाले को स्नातक और पूरे आठ सेमेस्टर उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी को ऑनर्स स्नातक के साथ रिसर्च की उपाधि दी जायेगी. रिसर्च की उपाधि उसी विद्यार्थी को मिलेगी जिसने पहले छह सेमेस्टर में 85 फीसदी अंक हासिल किये होंगे. प्रथम वर्षीय कोर्स में इंग्लिश/कम्युनिकेशन और दूसरा इन्वायरमेंट साइंस महत्वपूर्ण विषय होंगे. इसमें कुल 57 कोर्स होंगे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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