22 संस्थानों ने किया 50 लाख का गबन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jan 2016 4:33 AM (IST)
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शीघ्र दर्ज होगा सरकारी राशि गबन का मामला आरा : भोजपुर जिले में दशरथ मांझी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुदान मद में करीब 50 लाख रुपये की राशि लूट का मामला प्रकाश में आया है. इसके साथ ही प्रदेश में भी दशरथ मांझी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुदान मद में करोड़े रुपये लूट […]
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शीघ्र दर्ज होगा सरकारी राशि गबन का मामला
आरा : भोजपुर जिले में दशरथ मांझी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुदान मद में करीब 50 लाख रुपये की राशि लूट का मामला प्रकाश में आया है. इसके साथ ही प्रदेश में भी दशरथ मांझी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के अनुदान मद में करोड़े रुपये लूट की आशंका बढ़ गयी है.
जिलाधिकारी डॉ वीरेंद्र प्रसाद यादव द्वारा उक्त मामले की जांच को लेकर उपविकास आयुक्त इनायत खान की अध्यक्षता में गठित जांच टीम की प्राथमिक रिपोर्ट में दशरथ मांझी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के नाम पर हुई लाखों रुपये की लूट पर मुहर लग गयी है. जिले में 22 संस्थानों ने कल्याण विभाग से महादलित समुदाय के छात्र-छात्राओं में हुनर पैदा करने के नाम पर विभिन्न प्रखंडों में दशरथ मांझी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जाने का फर्जी दावा कर रहे थे.
इन संस्थानों के महादलित छात्रों को प्रशिक्षण दिये जाने के दावे जांच टीम द्वारा प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षण केंद्र की जांच के क्रम में कलई खुल कर सामने आ गयी है़
पिछले दिनों डीडीसी, एसडीओ सदर, एसडीओ पीरो तथा एसडीओ जगदीशपुर द्वारा अपने-अपने क्षेत्र स्थित प्रशिक्षण केंद्र की जांच की गयी थी. इस दौरान 22 संस्थानों में से लगभग 20-21 संस्थानों द्वारा विभिन्न प्रखंडों में खोले गये प्रशिक्षण केंद्रों में एक-दो को छोड़ कर करीब-करीब सभी प्रशिक्षण केंद्र बंद पाये गये थे. जो एक-दो केंद्र चल भी रहे थे उसमेें भी कई खामियां पायी गयी थीं. इसके बाद भोजपुर जिले में दशरथ मांझी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के नाम पर 22 प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा फर्जी कागजी चिट्ठा तैयार कर अनुदान मद में लूट का सच सामने आ गया है.
इस मामले के सामने आने के बाद जांच कमेटी नामांकित छात्रों के नाम, पता, जाति और खाते को खंगालने में जुटी हुई है. इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जब धरातल प्रशिक्षण केंद्र कार्यरत थे ही नहीं तो फिर संबंधित प्रखंड के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी और अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी इन संस्थानों के प्रशिक्षण दिये जाने संबंधित कागजात पर कैसे अनुशंसा करते आ रहे थे. ऐसे में बीडब्ल्यूओ और डीडब्ल्यूओ की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गयी है.
इसको लेकर डीएम के आदेश पर जांच टीम इन पदाधिकारियों की मिलीभगत होने के मामले की भी जांच कर रही है. उक्त घोटाला मामले की पूरी जांच रिपोर्ट दाखिल होने के बाद जिला कल्याण पदाधिकारी, अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी तथा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी पर भी सरकारी राशि की लूट में शामिल रहने को लेकर प्राथमिकी दर्ज हो सकती है.
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