जमींदारी तटबंध के दोनों ओर हो रहा भीषण कटाव, भूख से बिलबिला रहे बाढ़ पीड़ित

Updated at : 30 Sep 2019 5:28 AM (IST)
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जमींदारी तटबंध के दोनों ओर हो रहा भीषण कटाव, भूख से बिलबिला रहे बाढ़ पीड़ित

बिहपुर : लगातार हो रही बारिश के कारण नरकटिया गांव के पास लत्तीपुर नारायणपुर गंगा जमींदारी तटबंध की स्थिति बिगड़ती जा रही है. रविवार को तटबंध में कटाव का दायरा वर्तमान कटाव स्थल के अलावा दोनों ओर शुरू हो गया, जिससे स्थिति नाजुक हो गयी. हालांकि जल संसाधन विभाग की टीम के अलावा बड़ी संख्या […]

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बिहपुर : लगातार हो रही बारिश के कारण नरकटिया गांव के पास लत्तीपुर नारायणपुर गंगा जमींदारी तटबंध की स्थिति बिगड़ती जा रही है. रविवार को तटबंध में कटाव का दायरा वर्तमान कटाव स्थल के अलावा दोनों ओर शुरू हो गया, जिससे स्थिति नाजुक हो गयी. हालांकि जल संसाधन विभाग की टीम के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण बचाव कार्य में लगे रहे.
इसके बावजूद कटावस्थल से कुछ दूर दक्षिण की ओर तटबंध का तीन फीसदी हिस्सा कट गया और उत्तर की तरफ पक्की सड़क कटाव की भेंट चढ़ गयी. अब हालत यह हो गयी है कि तटबंध कभी भी नदी में समा सकता है. लगातार हो रही बारिश के कारण रविवार को पूरे दिन व रात को बचाव कार्य भी धीमा पड़ गया. बता दें कि सूबे जल संसाधन मंत्री संजय झा के निर्देश पर शनिवार की शाम से ही तटबंध को बचाने के लिए बोल्डर डालने का काम शुरू किया गया था.
रेलवे के अधिकारियों ने किया निरीक्षण: गंगा का पानी बिहपुर व नारायणपुर के बीच रेलखंड के काफी करीब पहुंच गया है. रविवार को सोनपुर के सीनियर डीएन टू आरके राज ने अन्य रेल अधिकारियों के साथ बिहपुर व नारायणपुर के बीच रेलखंड के बीच हालात का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है.
रेलवे ट्रैक : नन्हकार से बलाहा के बीच कटाव
नारायणपुर : बिहपुर व नारायणपुर रेलवे स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर पानी पर दबाव बढ़ गया है. नन्हकार व बलाहा ढाला के बीच रेवले लाइन के दक्षिण भाग में कटाव हो रहा है. नारायणपुर स्टेशन प्रबंधक रामचंद्र मंडल ने बताया कि अप व डाउन लाइन पर सभी ट्रेनों को कॉशन पर धीमी गति से चलाया जा रहा.
रविवार की शाम बचाव कार्य शुरू किया गया. बताया गया कि जलस्तर और बढ़ने और बारिश जारी रहने से खतरा और बढ़ सकता है. लगातार बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त : कहलगांव. पिछले कई दिनों से मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है. पूजा पंडालों का काम नहीं हो पा रहा है.
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श्रीरामपुर रिंग बांध टूटा, जलमग्न हुआ गांव
अकबरनगर . अकबरनगर का श्रीरामपुर रिंग बांध रविवार की देर शाम कुछ जगह टूट गया, जिसके बाद पूरा गांव जलमग्न हो गया. हजारों परिवार बाढ़ से प्रभावित हो गये.
बांध बचाने के प्रयास में ग्रामीण कई दिनों से लगे थे, लेकिन पानी का दबाव और लगातार हो रही बारिश के कारण बांध के ऊपर से पानी बहने लगा. बीडीओ प्रभात रंजन ने रविवार की देर शाम हालात का जायजा लेने के बाद बताया कि बांध टूटा नहीं है. पानी का दबाव अधिक होने के कारण बांध के ऊपर से पानी बहने लगा है, जो गांव में फैल गया है. कुछ जगहों पर मिट‍्टी का कटाव हो रहा है. प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री दी जायेगी. स्थानीय वार्ड सदस्य और ग्रामीण स्थिति पर नजर ख रहे हैं.
भारी वर्षा से तटबंधों की स्थिति खस्ताहाल, दहशत में ग्रामीण
नवगछिया : गंगा के जलस्तर में वृद्धि और पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार वर्षा से नवगछिया अनुमंडल में त्राहिमाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. नवगछिया में रविवार को गंगा का जलस्तर 33 मीटर रहा जो खतरे के निशान 31.60 सेमी से 1.40 सेमी ऊपर है. रविवार को नदी के जल स्तर में 10 सेमी की वृद्धि हुई. तेतरी जाह्नवी चौक 14 नंबर सड़क पर पानी के बहाव जारी है.
छोटी परबत्ता के पास सड़क से तेज रिसाव जारी रहने से जगतपुर पंचायत बाढ़ की चपेट में आ गयी है. वहीं कलबलिया धार के पास 14 नंबर सड़क पर दबाव बना हुआ है. सड़क के कभी भी ध्वस्त होने की आशंका है. 14 नंबर सड़क से पानी के बहाव खगड़ा एवं गरैया के पास से होने व कलबलिया धार के पास सड़क की स्थिति काफी दयनीय हो गयी है. सड़क पर आवागमन ठप हो चुका है.
भूख से बिलबिला रहे बाढ़ पीड़ित
बारिश के बीच बाढ़ पीड़ित तटबंधों और सड़कों के किनारे पॉलीथिन टांग कर रह रहे हैं. बाढ़ पीड़ित कुसो मंडल ने बताया कि घर डूब जाने के बाद और लोगों ने सड़क पर शरण लिया है लेकिन लगातार हो रही भारी बारिश में उन लोगों को यहां पर भी काफी मुश्किलों में डाल दिया है. चारों ओर पानी ही पानी है लेकिन वे लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं.
शौचालय के लिए भी उन लोगों के समक्ष कोई विकल्प नहीं है. श्याम मंडल ने कहा कि कहीं पर भी सूखी लकड़ी नहीं मिल रही है इस कारण उन लोगों के घर में खाना नहीं बन पा रहा है. वे लोग बाजार से खरीदकर सत्तू खा रहे हैं. लेकिन वैसे भी उन लोगों के पास कब है जो समाप्त हो गया तो उन लोगों को भूखे ही रहना पड़ेगा. अब तक पीएचइडी द्वारा निर्देश के बाद भी न तो चापाकल लगाये गये हैं और न ही अस्थायी शौचालय की व्यवस्था की गयी है.
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