सेवा की प्रतिमूर्ति थे संतसेवी महाराज

Updated at : 05 Jun 2014 1:39 PM (IST)
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सेवा की प्रतिमूर्ति थे संतसेवी महाराज

भागलपुर: भौतिक तथा आध्यात्मिक दु:खों की ज्वालाओं से तड़पते मानव को परम शांति की सुधा पिलाने वाले महर्षि संतसेवी महाराज का अवतरण मधेपुरा जिला के गम्हरिया गांव में 20 दिसंबर 1920 को हुआ था. वे तीन मार्च 1939 से नौ जून 1986 तक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के साथ छाया की तरह अपनी सेवा […]

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भागलपुर: भौतिक तथा आध्यात्मिक दु:खों की ज्वालाओं से तड़पते मानव को परम शांति की सुधा पिलाने वाले महर्षि संतसेवी महाराज का अवतरण मधेपुरा जिला के गम्हरिया गांव में 20 दिसंबर 1920 को हुआ था.

वे तीन मार्च 1939 से नौ जून 1986 तक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के साथ छाया की तरह अपनी सेवा में संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया और संतसेवी के नाम को सार्थक कर दिखाया. उक्त बातें आचार्य श्री हरिनंदन बाबा ने बुधवार को कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में महर्षि संतसेवी महाराज के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित सत्संग में कही.

महर्षि हरिनंदन बाबा ने कहा कि गुरु की सेवा में तन की अपेक्षा मन की अधिक कीमत होती है. जबतक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाय, अपने उद्देश्य में शिथिलता नहीं आने देना चाहिए. प्रात: तीन से चार बजे, पांच से छह बजे, 10 से 11 बजे, दोपहर दो से तीन बजे ध्यानाभ्यास हुआ. प्रात: कालीन सत्संग के बाद आठ बजे आचार्य श्री समेत आश्रम के सभी संतों व श्रद्धालुओं ने सद्गुरु महर्षि मेंहीं बाबा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की. 11 बजे भंडारा हुआ. भंडारा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद पाया. तीन बजे प्रमोद बाबा के स्तुति गान के साथ ही सत्संग का शुभारंभ हुआ.

गुरु सेवी भगीरथ बाबा ने अपने प्रवचन में सद्गुरु की वाणी का बखान करते हुए कहा कि महर्षि संतसेवी महाराज ने सांसारिक सुख का त्याग कर गुरु सेवा, सत्संग, स्वाध्याय और साधना का जीवन व्यतीत किया और साधना में परिपक्व होकर संसार को अमृतमय ज्ञान का प्रकाश दिया और संसार के लोगों का कल्याण किया. शांति संदेश पत्रिका के संपादक सह आश्रम प्रवक्ता डॉ गुरु प्रसाद बाबा ने कहा कि सत्संग करने से विषयों में विक्तता आती है, उपरामता आती है, अनासक्ति आती है. जिनका मन विषयों से निस्संग होगा, तो किधर जायेगा. निर्विषय में जायेगा. निर्विषय क्या है, वहीं निर्विषय तत्व परमात्मा है. आश्रम के व्यवस्थापक स्वामी स्वरूपानंद बाबा ने कहा कि आंतरिक सत्संग से मुक्ति मिलती है और बाह्य सत्संग से ध्यान-भजन करने की प्रेरणा मिलती है. महर्षि संतसेवी बाबा के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित सत्संग में गाजियाबाद से सरोज कारीवाल, गोविंद कारीवाल, सुपौल परसागढ़ी के अभिनंदन बाबा, पूर्णिया के शारदानंद यादव, लत्तीपुर के गोविंद मंडल समेत सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया.

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