बेगूसराय के कैलाशपुर में बाढ़ का पानी घटा, लेकिन राहत शिविर में अंधेरा, बिजली बंद होने से बढ़ी परेशानी

कैलाशपुर में बाढ़ का पानी घटने के बाद भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं. राहत शिविरों में बिजली नहीं है और खुले गड्ढों से मवेशियों को खतरा है. ग्रामीण प्रशासन से बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं.

Begusarai News: गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद बाढ़ की स्थिति में भले ही सुधार हुआ है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर चार स्थित कैलाशपुर में कई बाढ़ प्रभावित परिवार अब भी राहत शिविर में रहने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले जिला प्रशासन की ओर से कम्युनिटी किचन बंद कर दिया गया. इसके बाद राहत शिविर में बिजली की सुविधा भी बंद हो गयी. बिजली नहीं रहने से लोगों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ रही है.

गांव में अब भी कई जगह जमा है पानी

बाढ़ प्रभावित परिवारों के अनुसार गांव में अब भी कई स्थानों पर पानी जमा हुआ है. ऐसे में लोगों को अपने घर लौटने में परेशानी हो रही है. राहत शिविर में परिवार के साथ रहने वाले लोगों के सामने पशुओं को सुरक्षित रखने की भी समस्या बनी हुई है. कई पशुपालकों को अपने मवेशियों को खुले में रखने की मजबूरी है. बारिश होने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है.

ग्रामीणों का कहना है कि राहत शिविर में बिजली नहीं रहने के कारण रात के समय परिवार के सदस्यों के साथ पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है. अंधेरे में शिविर और आसपास के इलाकों में आवाजाही करना भी मुश्किल हो रहा है.

खुले गड्ढे में गिर रहे मवेशी

राहत शिविर में शौचालय की व्यवस्था के लिए गड्ढा खोदा गया था, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार उसे अब तक बंद नहीं किया गया है. गड्ढा खुला रहने और रात में अंधेरा होने के कारण कई बार गाय और भैंस उसमें गिर जा रहे हैं. इससे पशुपालकों की परेशानी बढ़ गयी है.

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के बाद संक्रमण और दुर्घटना का खतरा बना रहता है. ऐसे में राहत शिविर में बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. लोगों ने खुले गड्ढे को तत्काल बंद कराने की मांग की है, ताकि किसी व्यक्ति या पशु के साथ दुर्घटना न हो.

पानी निकलने तक बिजली उपलब्ध कराने की मांग

बाढ़ प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब तक गांव से पानी पूरी तरह नहीं निकल जाता और लोग अपने घरों में सुरक्षित तरीके से वापस नहीं लौट जाते, तब तक राहत शिविर में बिजली समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहनी चाहिए. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राहत शिविर में दोबारा बिजली की व्यवस्था कराने, खुले गड्ढे को बंद कराने और पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है.

ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ का पानी कम होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन जलजमाव और अन्य समस्याओं के कारण सामान्य जनजीवन अभी पटरी पर नहीं लौटा है. लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन की ओर से राहत शिविर की समस्याओं का जल्द समाधान किया जायेगा.

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By विवेक पाण्डेय

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले आठ वर्षों से मुख्यधारा की पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टीवी मीडिया से की, जहां बिहार की राजनीति से जुड़े कई प्रमुख नेताओं और जनप्रतिनिधियों के इंटरव्यू किए. वर्तमान मुख्यमंत्री के उपमुख्यमंत्री रहते हुए उनका इंटरव्यू करने के साथ-साथ उन्होंने कई मंत्रियों के इंटरव्यू और फील्ड रिपोर्टिंग भी की है.

ज्ञान की धरती नालंदा के रहने वाले विवेक रंजन पाण्डेय वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और विभिन्न स्रोतों से जानकारी का सत्यापन करना उनकी पत्रकारिता की प्रमुख विशेषता है. बिहार की राजनीति, शिक्षा और छात्र मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा प्रशासन, अपराध, रोजगार, मौसम और स्थानीय मुद्दों पर भी वह लगातार खबरें तैयार करते हैं.

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उन्होंने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी, पटना से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की है.

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