25 वर्ष पुराना शेड बना जानलेवा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Aug 2017 12:25 PM (IST)
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कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा बौंसी : पुरानी हाट परिसर स्थित बना शेड काफी जर्जर हो चुका हैं और हादसे को आमंत्रण दे रहा है. मालूम हो कि हाट परिसर की स्थिति काफी बदहाल है. दुकानदारों और ग्राहकों के लिए यहां सुविधाओं का घोर अभाव है. करीब 25 वर्ष पूर्व दुकानदारों एवं किसानों […]
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कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
बौंसी : पुरानी हाट परिसर स्थित बना शेड काफी जर्जर हो चुका हैं और हादसे को आमंत्रण दे रहा है. मालूम हो कि हाट परिसर की स्थिति काफी बदहाल है. दुकानदारों और ग्राहकों के लिए यहां सुविधाओं का घोर अभाव है.
करीब 25 वर्ष पूर्व दुकानदारों एवं किसानों के लिए बैठ कर सामान व सब्जी बेचने एवं आराम करने के लिए पुरानी हाट परिसर में 6 शेड का निर्माण कराया गया था. जिनमें से एक शेड को तोड़कर गिरा दिया गया है. लेकिन वक्त के साथ-साथ यह शेड अब काफी जर्जर हो चुका है, शेड के ऊपर लगा एस्बेस्टस कई जगह से टूट चुका है.
जिसकी वजह से बारिश के दिनों में यहां बैठना काफी मुश्किल होता है. शेड के पाये की छड़ें अब बाहर दिखाई पड़ने लगी है. हल्की सी हवा चलने पर यह सूखे पत्ते की तरह कांपने लगता है. जानकारी हो की सप्ताह में 2 दिन शनिवार और बुधवार को यहां हाट लगता है. जहां करीब 300 छोटे-बड़े दुकानदार सब्जी के साथ-साथ राशन-पानी एवं अन्य सामानों की बिक्री के लिए आते हैं. वहीं प्रखंड क्षेत्र के अलावा आसपास के गांव के लोग अपने घरों के जरूरत की सामान के अलावा सब्जी खरीदने यहां पहुंचते हैं.
इन्हीं जर्जर शेड के नीचे कपड़े, मनिहारी एवं अन्य दुकानें लगाकर दुकानदार भगवान का नाम लेकर अपने सामानों की बिक्री करते हैं. उन्हें हर वक्त यह भय सताता है कि कहीं यह गिर ना जाय. ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को नहीं है. मालूम हो कि प्रतिवर्ष इस हाट से अंचल को काफी राजस्व की प्राप्ति भी होती है. लेकिन अंचल प्रशासन द्वारा आज तक इसकी मरम्मती के लिए कोई उपाय नहीं किया गया. यह कभी भी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है. इसके बावजूद इस दिशा में प्रशासन का ध्यान नहीं है. शेड की देखरेख व समय-समय पर मरम्मत नहीं कराये जाने की वजह से यह खंडहर में तब्दील हो गयी है.
देखने से लगता है कि यह कभी भी गिर कर ध्वस्त हो सकता है. लेकिन इसकी मरम्मति की दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है. इसकी जर्जरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोई पशु जब इसके पाये में अपना शरीर रगड़ता है तो यह हिलने लगता है. स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी कई बार इसकी स्थिति को देख चुके हैं लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं. जिसके कारण लोगों की जान हमेशा सांसत में पड़ी रहती है.
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