अररिया : भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज गांवपालिका-3 स्थित दारुल उलूम अलसफा मदरसे की कानूनी स्थिति और संचालन को लेकर नेपाल प्रशासन ने जांच तेज कर दी है. सांप्रदायिक तनाव की घटना के बाद शुरू हुई जांच में मदरसे के पंजीकरण और संचालन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल सामने आए हैं. देवानगंज गांवपालिका ने पुष्टि की है कि मदरसा उसके या संबंधित वार्ड कार्यालय में पंजीकृत नहीं है. प्रशासन ने मदरसा प्रबंधन को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तीन दिन का समय दिया है.
पंजीकरण को लेकर प्रशासन ने मांगे दस्तावेज
देवानगंज गांवपालिका की शिक्षा, युवा एवं खेलकूद शाखा ने मदरसा प्रबंधन से पंजीकरण, संचालन की अनुमति, शिक्षकों, विद्यार्थियों, पाठ्यक्रम, भवन और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े प्रमाणित दस्तावेज मांगे हैं. जिला प्रशासन की अनुगमन टीम ने भी मदरसे का स्थलीय निरीक्षण किया है. प्रशासन के मुताबिक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
गांवपालिका के अनुसार उसके क्षेत्र में फिलहाल तीन धार्मिक शिक्षण संस्थान पंजीकृत हैं. इनमें वार्ड-1 का उस्मानिया आइडियल पब्लिक स्कूल, वार्ड-2 का मदरसा इस्लामिया और वार्ड-7 का श्री पशुपति शिक्षा मंदिर शामिल हैं.
भारतीय बच्चों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार दारुल उलूम अलसफा में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें भारत के सीमावर्ती राज्यों से आए बच्चों के होने का दावा किया जा रहा है. रिपोर्टों में भारतीय विद्यार्थियों की संख्या करीब 2,500 और कुल विद्यार्थियों की संख्या करीब 5,000 बताई गई है. हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है.
यदि ये आंकड़े जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि बिना स्थानीय पंजीकरण वाले संस्थान में दूसरे देश के इतनी बड़ी संख्या में बच्चे किस प्रक्रिया के तहत रहकर पढ़ाई कर रहे थे. उनके प्रवेश, आवास, अभिभावकीय सहमति, पहचान और सुरक्षा से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ, यह भी जांच का विषय बन सकता है.
59 पन्नों की जांच रिपोर्ट में सीमावर्ती मदरसों का भी जिक्र
नेपाल में हालिया हिंसा की जांच को लेकर गृह मंत्रालय को सौंपी गई 59 पन्नों की रिपोर्ट में सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित धार्मिक शिक्षण संस्थानों, खुले भारत-नेपाल बॉर्डर और संभावित अवैध गतिविधियों को लेकर चिंता जताई गई है. रिपोर्ट में मदरसों के पंजीकरण, पाठ्यक्रम, आर्थिक स्रोत और संचालन की नियमित निगरानी की जरूरत बताई गई है.
रिपोर्ट में मौलाना इलियास मंसूरी की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप और आशंकाएं दर्ज होने की बात सामने आई है. हालांकि इन आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. मामले में जांच और आधिकारिक कार्रवाई का परिणाम सामने आना बाकी है.
भारत-नेपाल सीमा की निगरानी पर भी उठे सवाल
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है. ऐसे में किसी गैर-पंजीकृत संस्थान में दूसरे देश के बड़ी संख्या में बच्चों के रहने और पढ़ने की जानकारी सामने आना सीमा प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर सत्यापन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है.
हालांकि, किसी संस्थान के पंजीकरण संबंधी उल्लंघन को सीधे सुरक्षा या आपराधिक गतिविधि से जोड़ना उचित नहीं होगा. इसके लिए जांच एजेंसियों की ठोस रिपोर्ट और प्रमाण जरूरी होंगे.
प्रशासन की जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
नेपाल प्रशासन ने फिलहाल मदरसे के दस्तावेज, संचालन प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है. तीन दिन में मांगे गए दस्तावेज मिलने और उनके सत्यापन के बाद मदरसे की वास्तविक कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. फिलहाल इस पूरे मामले ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में संचालित धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के पंजीकरण, निगरानी और विदेशी विद्यार्थियों के सत्यापन को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है.
