क्या है आईसीसी हॉल ऑफ फेम जिसमें अबतक सिर्फ 11 भारतीय शामिल, महेंद्र सिंह धोनी ने जतायी खुशी

ICC Hall Of Fame : भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ कप्तान और फिनिशर में शामिल महेंद्र सिंह धोनी की प्रतिभा को अब आईसीसी हॉल ऑफ फेम ने भी मान्यता दे दी है और उन्हें लिस्ट में शामिल कर लिया है. ऐसा नहीं है कि इस लिस्ट में शामिल होने से पहले धोनी महान खिलाड़ी नहीं थे, लेकिन यह एक तमगा है, जो अब उन्हें मिल गया है. 2025 में 7 लोगों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है.

ICC Hall Of Fame : आईसीसी हॉल ऑफ फेम में कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी को शामिल कर लिया गया है. इस सम्मान को हासिल करने वाले वे 11वें भारतीय हैं. सबसे पहले यह सम्मान लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर और बिशन सिंह बेदी को 2009 में दिया गया था.आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल होने के बाद महेंद्र सिंह धोनी ने खुशी जाहिर की है और कहा है कि वे सम्मानित महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह विभिन्न पीढ़ियों के क्रिकेटर्स के योगदान को सम्मान देने का मंच है.

कैप्टन कूल के मिजाज से आईसीसी हुआ कूल

आईसीसी हॉल ऑफ फेम में महेंद्र सिंह धोनी को शामिल करने पर आईसीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि महेंद्र सिंह धोनी तमाम दबाव के बावजूद अपनी रणनीति बनाने में एक्सपर्ट हैं. वे एक कुशल फिनिशर, लीडर और खिलाड़ी हैं. खासकर क्रिकेट के छोटे फार्मेट में उन्होंने शानदार खेल दिखाया है. उनके रिकाॅर्ड उन्हें खिलाड़ी बनाते हैं और उनका करियर बहुत ही लंबा और बेहतरीन है. महेंद्र सिंह धोनी ने खुशी जताते हुए कहा कि उनका खेल और उनका योगदार हमेशा उनके साथ रहेगा. 2025 में जिन सात खिलाड़ियों को इस फेम में शामिल किया गया है उनके नाम हैं-मैथ्यू हेडन, हाशिम अमला, महेंद्र सिंह धोनी, ग्रीम स्मिथ,डेनियल विटोरी, सना मीर और सराह टेलर.

क्या है आईसीसी हॉल ऑफ फेम

आईसीसी हॉल ऑफ फेम

आईसीसी हॉल ऑफ फेम की शुरुआत 2009 में हुई थी, जिसका लक्ष्य क्रिकेट के दिग्गजों को उनकी उपलब्धियों के लिए मान्यता देना है. आईसीसी ने 2 जनवरी 2009 को दुबई में फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल क्रिकेटर्स एसोसिएशन (FICA) के सहयोग से ICC के शताब्दी समारोह के अवसर पर इसे लॉन्च किया गया था. बाद में हर साल इस फेम में उन खिलाड़ियों को जोड़ा जाता है, जिन्होंने क्रिकेट के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया है. इस फेम में शामिल होने के बाद एक तरह से उस खिलाड़ी के योगदानों को हमेशा के लिए याद रख लिया जाता है. आईसीसी हॉल ऑफ फेम में स्त्री-पुरुष दोनों ही क्रिकेट खिलाड़ियों को शामिल किया जाता है.

आईसीसी हॉल ऑफ फेम में कितने भारतीय

आईसीसी हॉल ऑफ फेम में अबतक 11 भारतीय शामिल किए जा चुके हैं. इनके नाम हैं- सुनील गावस्कर, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर, वीनू मांकड़,डायना एडुल्जी,वीरेंद्र सहवाग,नीतू डेविड और महेंद्र सिंह धोनी. कुल 11 खिलाड़ियों में दो महिला क्रिकेटर भी शामिल हैं. आईसीसी हॉल ऑफ फेम में कुल 122 लोग शामिल हैं, जिनमें से महज 11 भारतीय हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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